अंबाला छावनी में स्थित लगभग चार सदियों पुराना रानी का तालाब अब सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक पूर्ण विकसित पर्यटन स्थल के तौर पर बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। कैंटोनमेंट बोर्ड ने तालाब और आसपास के परिसर को आकर्षक बनाने की दिशा में विस्तृत प्लान तैयार किया है, जिसमें साफ-सफाई, बुनियादी सुविधाएं और आने वाले समय में बोटिंग जैसी आधुनिक गतिविधियां भी शामिल हैं।
इतिहास और आस्था का संगम
शिव मंदिर और ज्ञासी माता मंदिर के पास स्थित यह तालाब कलसिया रियासत की ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, छछरौली (कलसिया) रियासत के राजा रणजीत सिंह की रानी यहां नियमित रूप से शाही स्नान किया करती थीं। स्नान के बाद वह पास के शिव मंदिर में पूजा-अर्चना भी करती थीं।
इतिहासकारों का मानना है कि इस तालाब का निर्माण तत्कालीन राजपरिवार द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों और सामुदायिक उपयोग को ध्यान में रखते हुए करवाया गया था। यही वजह है कि आज भी यह स्थान उत्तर भारत के कई राज्यों पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और राजस्थान से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
आस्था से पर्यटन तक: क्यों जरूरी है यह कदम?
कैंटोनमेंट बोर्ड के अनुसार, मंदिर और तालाब की वार्षिक मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन पुरानी संरचना अपने ऐतिहासिक महत्व के बावजूद पर्यटक सुविधाओं के अभाव में कम ध्यान आकर्षित कर पाती है।
पर्यटन विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी विरासत साइटों को विकसित करना न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, बल्कि युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ने का एक प्रभावी तरीका भी है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि धार्मिक और हेरिटेज टूरिज्म देश की GDP में लगातार बढ़ती हिस्सेदारी निभा रहा है। रानी का तालाब जैसे स्थल इस श्रेणी को और मजबूत कर सकते हैं।
क्या-क्या बदलेगा?
कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा प्रस्तावित योजना के तहत:
तालाब को झील जैसा स्वरूप दिया जाएगा
परिसर की नवीनीकरण व सुंदरता बढ़ाई जाएगी
आगंतुकों के लिए बैठने, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई की उन्नत सुविधा
तालाब में बोटिंग की शुरुआत
मंदिर के आसपास आस्थात्मक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बेहतर व्यवस्था
स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि
सीईओ राहुल आनंद शर्मा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि छावनी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत बनाएगा।
स्थानीय व्यापारी और निवासी इस योजना को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यदि तालाब को बेहतर तरीके से विकसित किया जाए तो यह अंबाला का एक खास टूरिस्ट स्पॉट बन सकता है, जिससे दुकानों, होटलों और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलेगा।













