Big action of Haryana Right to Service Commission Negligence in will verification in Karnal, 5 thousand compensation to complainant: हरियाणा के करनाल में पंजीकृत वसीयतों के सत्यापन में गंभीर अनियमितताओं पर सेवा का अधिकार आयोग ने सख्त कार्रवाई की है।
सहायक जिला अटॉर्नी की लापरवाही और पक्षपात के चलते शिकायतकर्ता को 5 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। आइए, इस मामले की पूरी जानकारी लेते हैं।
करनाल में वसीयत सत्यापन में अनियमितताएं Haryana Right to Service Commission
हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने करनाल के एस्टेट ऑफिस में वसीयत सत्यापन की प्रक्रिया में बड़ी खामियां पकड़ी हैं। आयोग की जांच में पता चला कि सहायक जिला अटॉर्नी अवतार सिंह सैनी ने सत्यापन प्रक्रिया में एकरूपता का पालन नहीं किया।
चुनिंदा आवेदकों को जानबूझकर परेशान किया गया, जिसे आयोग ने संगठित उत्पीड़न का मामला माना है। रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि ज्यादातर फाइलों में एकसमान टिप्पणियां थीं, जिससे यह सवाल उठता है कि सत्यापन वास्तव में हुआ भी या नहीं।
सहायक जिला अटॉर्नी की जिम्मेदारी पर सवाल
आयोग ने सहायक जिला अटॉर्नी के बचाव में दिए गए तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। सैनी ने दावा किया कि उनकी सिफारिशें अंतिम नहीं थीं,
लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि इससे वे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। आयोग ने इसे न केवल व्यक्तिगत लापरवाही, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई अनियमितता माना। सहायकों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
आयोग का सख्त आदेश
आयोग ने नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि सहायक जिला अटॉर्नी अवतार सिंह सैनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। इस कार्रवाई की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर आयोग को सौंपनी होगी।
इसके अलावा, हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 की धारा 17(1)(एच) के तहत शिकायतकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल को 5 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यह राशि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) अपने फंड से देगा, जिसे बाद में दोषी अधिकारियों से वसूला जाएगा।
शिकायतकर्ता को न्याय
आयोग ने शिकायतकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल को बार-बार परेशान किए जाने को गंभीरता से लिया। मुआवजे का आदेश न केवल शिकायतकर्ता को राहत देगा, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सेवा का अधिकार आयोग जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेता है। यह कदम सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा।
जवाबदेही का सबक
यह मामला सरकारी अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है कि लापरवाही और पक्षपात का कोई स्थान नहीं है। आयोग की यह कार्रवाई न केवल करनाल, बल्कि पूरे हरियाणा में सरकारी सेवाओं में सुधार लाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। आम जनता को उम्मीद है कि ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में अनियमितताओं को रोकेंगी।













