Crisis on HKRNL employees in Haryana, Saini government’s order, thousands of jobs in danger: हरियाणा में हजारों युवाओं के सपनों पर उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब सैनी सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) के तहत काम करने वाले अनुबंधित कर्मचारियों के लिए एक सख्त आदेश जारी किया।
इस आदेश ने न केवल कर्मचारियों की नींद उड़ा दी, बल्कि उनकी रोजी-रोटी पर भी सवाल खड़े कर दिए। आइए जानते हैं कि इस आदेश का क्या मतलब है और यह कर्मचारियों के भविष्य को कैसे प्रभावित करेगा।
HKRNL: युवाओं के लिए उम्मीद की किरण HKRNL employees in Haryana
हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) की स्थापना का मकसद था युवाओं को सरकारी विभागों में अनुबंध के आधार पर रोजगार देना। हिसार, रोहतक, गुरुग्राम, करनाल, फरीदाबाद जैसे जिलों में हजारों युवा इस प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी नौकरियां कर रहे हैं।
पहले यह काम निजी एजेंसियों के जरिए होता था, लेकिन पारदर्शिता और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए HKRNL की शुरुआत की गई। यह निगम युवाओं के लिए एक उम्मीद की किरण बना, लेकिन अब सरकार का नया आदेश इस उम्मीद को धूमिल कर रहा है।
सरकार का आदेश: पुराने कर्मचारियों पर संकट
3 अप्रैल 2025 को जारी सरकारी आदेश ने HKRNL और आउटसोर्सिंग पॉलिसी (पार्ट-1 और पार्ट-2) के तहत काम करने वाले कर्मचारियों में हड़कंप मचा दिया। आदेश के मुताबिक, अगर किसी विभाग, बोर्ड या निगम में रिक्त पद नहीं हैं और ग्रुप-सी के नए कर्मचारियों को नियुक्त करना है, तो पुराने अनुबंधित कर्मचारियों को हटाया जा सकता है। खासकर, 15 अगस्त 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर यह खतरा मंडरा रहा है।
सरकार ने ‘पहले आओ, पहले जाओ’ (First In, First Out) सिद्धांत को लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत सबसे पहले नियुक्त कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह नियम उन कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है, जो सालों से मेहनत और लगन से काम कर रहे हैं।
कुछ को राहत, कुछ को झटका
आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि 15 अगस्त 2019 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को हरियाणा अनुबंधित कर्मचारी (सेवा की सुरक्षा) अधिनियम 2024 के तहत संरक्षण मिलेगा।
उनके मामलों की समीक्षा होगी, और उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी। लेकिन 2019 के बाद नियुक्त हजारों कर्मचारियों के लिए यह आदेश किसी बुरे सपने से कम नहीं। इन कर्मचारियों ने मेहनत से अपनी जगह बनाई थी, और अब उनकी नौकरी पर तलवार लटक रही है। यह फैसला उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डाल सकता है।
विपक्ष का हंगामा, सरकार पर सवाल
इस आदेश ने राजनीतिक मोर्चे पर भी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने की बजाय उनकी नौकरियां छीन रही है। सुरजेवाला ने इसे अमानवीय कदम बताते हुए ट्वीट किया, “HKRNL के जरिए मेहनत करने वाले हजारों युवाओं को एक झटके में बेरोजगार करना कहां का इंसाफ है?” विपक्ष का यह हमला सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
कर्मचारियों का भविष्य अधर में
यह आदेश उन कर्मचारियों के लिए गहरी चिंता का कारण बन गया है, जो अपनी मेहनत और लगन से सरकारी विभागों में योगदान दे रहे थे।
सवाल यह है कि क्या सालों की मेहनत को इस तरह नजरअंदाज करना उचित है? क्या सरकार का यह कदम वाकई पारदर्शिता और नए अवसरों का रास्ता खोलेगा, या यह हजारों परिवारों के लिए आर्थिक संकट लाएगा? यह घटना न केवल कर्मचारियों, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
एक उम्मीद की तलाश
HKRNL कर्मचारियों की इस मुश्किल घड़ी में जरूरत है कि सरकार उनके हितों को ध्यान में रखे। नौकरी छिनने का डर न केवल कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ता है, बल्कि उनके परिवारों पर भी गहरा असर डालता है।
सरकार को चाहिए कि वह नए अवसरों के साथ-साथ पुराने कर्मचारियों की मेहनत को भी सम्मान दे। यह समय एकजुटता और समाधान का है, ताकि हरियाणा के युवा अपने भविष्य को लेकर आशावान रहें।












