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Haryana-Punjab water dispute: हरियाणा-पंजाब जल विवाद, पंजाब का शानदार इनकार, हरियाणा में पानी की किल्लत

On: मई 16, 2025 9:51 पूर्वाह्न
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Haryana-Punjab water dispute: हरियाणा-पंजाब जल विवाद, पंजाब का शानदार इनकार, हरियाणा में पानी की किल्लत
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Haryana-Punjab water dispute, Punjab’s spectacular denial, water shortage in Haryana: हरियाणा और पंजाब के बीच जल विवाद (water dispute) एक बार फिर सुर्खियों में है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की हालिया बैठक में पंजाब ने हरियाणा की अतिरिक्त पानी की मांग को ठुकरा दिया, जिससे हरियाणा के कई जिलों में जल संकट (water crisis) गहराने की आशंका बढ़ गई है।

हरियाणा ने 21 मई से शुरू होने वाले नए सर्किल के लिए भाखड़ा से 10,300 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन पंजाब ने इसका कड़ा विरोध (opposition) किया। BBMB चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने दोनों राज्यों के बीच तनाव को देखते हुए 21 मई से पहले फैसला लेने का आश्वासन दिया है। इस बीच, हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने पंजाब की मान सरकार को जल संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आइए, इस विवाद की पूरी कहानी और इसके प्रभावों को समझते हैं।

हरियाणा-पंजाब जल विवाद: BBMB की बैठक में तनाव Haryana-Punjab water dispute

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की गुरुवार को हुई तकनीकी कमेटी की बैठक में हरियाणा-पंजाब जल विवाद (water dispute) ने तूल पकड़ लिया। हरियाणा ने नए सर्किल के लिए अपने तय कोटे से 1,400 क्यूसेक अधिक, यानी 10,300 क्यूसेक पानी की मांग रखी।

पंजाब के अधिकारियों, जिसमें सचिव कृष्ण कुमार और चीफ इंजीनियर शेर सिंह शामिल थे, ने इस मांग का कड़ा विरोध (opposition) किया। पंजाब ने तर्क दिया कि भाखड़ा मेन लाइन की कुल क्षमता 11,700 क्यूसेक है, और अगर हरियाणा को इतना पानी दिया गया तो पंजाब को केवल 1,600 क्यूसेक पानी मिलेगा, जो उसके हितों के खिलाफ है। बैठक में राजस्थान और हिमाचल के प्रतिनिधि भी मौजूद थे, और राजस्थान ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान अतिरिक्त पानी देने के लिए पंजाब का आभार जताया।

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पंजाब का दावा: पहले दिया अतिरिक्त पानी वापस दो

पंजाब के जलस्रोत मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने दावा किया कि पंजाब ने 4 अप्रैल से हरियाणा को पीने के लिए 4,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी दिया था। अब पंजाब ने BBMB से मांग की है कि नए सर्किल में जब उसे पानी की जरूरत होगी, तो हरियाणा के हिस्से से यह पानी समायोजित (adjusted) किया जाए।

पंजाब का कहना है कि उसने अपने कोटे से कटौती कर हरियाणा की मदद की, लेकिन अब वह अपने हितों की रक्षा करेगा। यह मांग हरियाणा के लिए नई चुनौती बन सकती है, क्योंकि कई जिले पहले ही जल संकट (water crisis) से जूझ रहे हैं। इस विवाद पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 20 मई को सुनवाई होनी है, जो इस मामले में निर्णायक हो सकती है।

हरियाणा की स्थिति: जल संकट और आरोप

हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने जल संकट (water crisis) के लिए पंजाब की मान सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि पंजाब लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन कर रहा है। हरियाणा के कई जिले, खासकर ग्रामीण क्षेत्र, पानी की कमी से प्रभावित हैं।

किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा, और पीने के पानी की किल्लत भी बढ़ रही है। चौधरी ने दावा किया कि बांध से पानी को लेकर कोई विवाद नहीं था, लेकिन पंजाब की अड़ियल रवैये ने स्थिति को बिगाड़ दिया। हरियाणा अब BBMB के फैसले और हाईकोर्ट की सुनवाई (court hearing) पर निर्भर है।

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BBMB चेयरमैन का हस्तक्षेप

बैठक में जब हरियाणा और पंजाब के बीच तनाव बढ़ने लगा, तो BBMB चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने हस्तक्षेप (intervention) किया। उन्होंने दोनों राज्यों के अधिकारियों को शांत करते हुए कहा कि वह इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे।

त्रिपाठी ने हरियाणा की मांग पत्र और पंजाब के विरोध पत्र को रिकॉर्ड पर लिया और आश्वासन दिया कि 21 मई से पहले दोनों पक्षों की सहमति से फैसला लिया जाएगा। यह हस्तक्षेप विवाद को और गहराने से रोकने में महत्वपूर्ण साबित हुआ, लेकिन हरियाणा के निवासियों के लिए पानी की समस्या का समाधान अभी बाकी है।

जल संकट का प्रभाव और समाधान की जरूरत

हरियाणा-पंजाब जल विवाद (water dispute) का सबसे ज्यादा असर हरियाणा के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों पर पड़ रहा है। पानी की कमी से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है, और कई गांवों में पीने का पानी भी मुश्किल से मिल रहा।

यह विवाद न केवल दोनों राज्यों के बीच तनाव को बढ़ा रहा है, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का समाधान तभी संभव है, जब दोनों राज्य आपसी सहमति और दीर्घकालिक जल प्रबंधन (water management) पर काम करें। BBMB और हाईकोर्ट के फैसले इस दिशा में महत्वपूर्ण होंगे।

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हरियाणा के लोगों की उम्मीद

हरियाणा के लोग इस जल विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। किसान, मजदूर, और ग्रामीण निवासी पानी की किल्लत से परेशान हैं, और वे सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। BBMB की 21 मई से पहले होने वाली निर्णय प्रक्रिया और हाईकोर्ट की सुनवाई (court hearing) इस मामले में निर्णायक हो सकती है।

हरियाणा सरकार भी केंद्र और BBMB के साथ मिलकर इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रही है। हम उम्मीद करते हैं कि यह विवाद जल्द सुलझेगा और हरियाणा के लोगों को पर्याप्त पानी मिलेगा। हम आपको इस मामले से जुड़े हर अपडेट से जोड़े रखेंगे। तब तक, पानी का समझदारी से उपयोग करें और इस मुद्दे पर अपनी राय साझा करें।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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