हरियाणा के पानीपत और सोनीपत जिले में फैले बच्चों की सीरियल किलिंग मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। पानीपत में गिरफ्तार की गई पूनम नामक महिला ने पुलिस पूछताछ में चार बच्चों की हत्या कबूलने के बाद अब उसके खिलाफ एक और हत्या केस दर्ज किया गया है।
गिरफ्तारी के बाद खुला चौंकाने वाला राज
एक दिसंबर को पानीपत पुलिस ने छह साल की बच्ची विधि की मौत की जांच के बाद पूनम को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने न केवल विधि और जिया की हत्या स्वीकार की, बल्कि यह भी बताया कि उसने दो अन्य बच्चों की जान ली।
इस खुलासे के आधार पर गोहाना के बरोदा थाना में उसके खिलाफ डबल मर्डर का नया मामला दर्ज किया गया है। यह केस शुभम (3 वर्ष) और इशिका (10 वर्ष) की हत्या को लेकर है, जिसकी शिकायत पूनम के पति नवीन ने कराई।
पुलिस अब पानीपत से प्रोडक्शन वारंट लेकर महिला को गोहाना लाने की तैयारी में है।
पूनम ने क्यों की हत्या, पुलिस जांच में सामने आया सनसनीखेज कारण
पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने दो साल में तीन बच्चियों की हत्या कर दी क्योंकि उसे उनकी सुंदरता से जलन होने लगी।
पानीपत पुलिस ने बताया कि पूनम ऐसी बच्चियों को देखकर चिड़ जाती थी और उसे लगता था कि वे भविष्य में उससे ज्यादा सुंदर बन जाएंगी। यही वजह बताकर उसने अपराध कबूला।
शक से बचने के लिए उसने अपने ही तीन वर्षीय बेटे शुभम को भी खत्म कर दिया, जिससे परिवार उसकी हरकतों पर शक न करे।
कैसे करती थी हत्या, एक ही तरीका अपनाया
मामले की जांच में पुलिस ने बताया कि पूनम ने हर हत्या एक जैसी तरह से की।
वह बच्चों को पानी से भरे टब या टैंक में डुबोकर मौत के घाट उतार देती।
पानीपत के पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह के मुताबिक, आरोपी महिला मानसिक रूप से अस्थिर लगती है।
उन्होंने बताया कि तीनों मृत बच्चियां रिश्तेदारी में उसकी ही भतीजियां थीं, जो परिवार के साथ शादी समारोह में आई थीं।
परिवारों ने इन मौतों को दुर्घटना समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, इसलिए मामला पहले सामने नहीं आया।
हत्या का इतिहास, कब हुई कौन सी वारदात
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पूनम ने:
2023 में भावर गांव में अपने बेटे सहित दो बच्चों को मारा
2024 के अगस्त में सिवाह गांव में एक और बच्ची की हत्या की
अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का एक अन्य बच्चा अभी जिंदा है।
मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल, विशेषज्ञों ने क्या कहा
अपराध मनोविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर ईर्ष्या आधारित मानसिक विकृति,
अनियंत्रित नफरत और इलाज न हुआ मानसिक रोग शामिल होते हैं।
उनके अनुसार, इस घटना ने फिर साबित किया है कि परिवारिक अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य पर समाज को गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
यह सिर्फ अपराध नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, बच्चों की सुरक्षा और घरेलू हिंसा से जुड़ा व्यापक सवाल है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने मामले का खुलासा किया, जो अन्यथा दुर्घटना समझकर दबा दिया जाता।
यह घटना बताती है कि बच्चों की असामान्य मौतों की जांच कितनी जरूरी है।












