Pandit Dhirendra Shastri resolve to undertake padyatra across the country to unite Hindus:
हरियाणा के गुरुग्राम और चरखी दादरी में हाल ही में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी उपस्थिति से श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं थी,
बल्कि इसमें एक बड़ा सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश भी छिपा था। पंडित शास्त्री ने देश के हिंदुओं को एकजुट करने का संकल्प लिया है और इसके लिए देश के हर कोने में पदयात्रा करने की घोषणा की है। उनकी यह पहल न केवल धार्मिक एकता को बढ़ावा देगी, बल्कि सामाजिक समरसता को भी मजबूत करेगी।
गुरुग्राम में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आलोक Pandit Dhirendra Shastri
गुरुग्राम के सेक्टर-43 में स्थित अंजनी पुत्र बालाजी मंदिर में शुक्रवार की रात एक भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मंदिर में आरती की और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
समारोह में हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ी, जो बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर के दर्शन और उनके प्रवचनों को सुनने के लिए उत्साहित थे। इस दौरान पंडित शास्त्री ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, “यह घटना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक चेतावनी भी है। हमें क्षेत्रवाद, भाषावाद और जातिवाद के बंधनों से ऊपर उठकर एकजुट होने की जरूरत है।”
हिंदुओं की एकता के लिए पदयात्रा
पंडित शास्त्री ने अपने संबोधन में हिंदुओं की एकता को सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि भारत में जहां हिंदू आबादी 80 प्रतिशत से अधिक है, वहां भी हिंदुओं को खतरा महसूस हो रहा है। “पहलगाम की घटना ने यह साबित कर दिया कि आतंकवाद किसी जाति, वर्ग या भाषा को नहीं देखता।
वह केवल हिंदू होने की पहचान पर हमला करता है। ऐसी स्थिति में हमें एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी होगी।” इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने देशभर में पदयात्रा करने का ऐलान किया। यह यात्रा न केवल धार्मिक जागरूकता फैलाएगी, बल्कि हिंदुओं को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता को भी मजबूत करेगी।
चरखी दादरी में धर्म ध्वजा का अनावरण
इससे पहले, पंडित शास्त्री ने चरखी दादरी के खटाना-धीरखेड़ा गांव में एक और महत्वपूर्ण आयोजन में हिस्सा लिया। यहां नहर के किनारे बने हनुमान मंदिर में उन्होंने 108 फुट ऊंची धर्म ध्वजा का अनावरण किया।
यह आयोजन स्थानीय ग्रामीणों के लिए विशेष महत्व रखता था, क्योंकि वे पिछले दो साल से इस पल का इंतजार कर रहे थे। दो बार कार्यक्रम रद्द होने के बाद, इस बार पंडित शास्त्री की उपस्थिति ने ग्रामीणों का उत्साह दोगुना कर दिया। लगभग दो घंटे तक मंदिर में रुककर उन्होंने भक्तों के साथ समय बिताया और धर्म ध्वजा के महत्व पर प्रकाश डाला।
सामाजिक एकता का संदेश
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचनों में बार-बार सामाजिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमें यह समझना होगा कि हमारी ताकत हमारी एकता में है।
अगर हम बंटे रहेंगे, तो न केवल हमारा धर्म, बल्कि हमारा देश भी कमजोर होगा।” उनकी यह बातें श्रद्धालुओं के दिलों को छू गईं और उन्होंने उनके इस संकल्प का समर्थन किया। पंडित शास्त्री का यह प्रयास न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर भी एक सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक कदम है।
भविष्य की योजनाएं और अपील
पंडित शास्त्री ने अपनी पदयात्रा को जल्द शुरू करने की बात कही। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस अभियान में उनका साथ दें और अपने स्तर पर भी सामाजिक एकता को बढ़ावा दें।
“हर हिंदू को यह प्रण लेना चाहिए कि वह अपने समाज और देश के लिए कुछ न कुछ योगदान देगा। यह समय जागने और एकजुट होने का है।” उनकी यह अपील युवाओं में विशेष रूप से उत्साह भर रही है, जो उनके इस मिशन को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रचारित कर रहे हैं।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री की यह पहल निश्चित रूप से देश में एक नई जागरूकता लाएगी। उनकी पदयात्रा और सामाजिक एकता का संदेश न केवल हिंदुओं को एकजुट करेगा, बल्कि भारत को और मजबूत बनाने में भी योगदान देगा।











