कुरुक्षेत्र में पर्यटन को नई पहचान देने के लिए श्रीकृष्ण संग्रहालय का विस्तार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही यहां आगंतुकों को गंधार, सिंध, तक्षशिला, और महाभारतकालीन भारत के अन्य प्रमुख स्थलों की झलक एक ही छत के नीचे देखने को मिलेगी। इसके साथ ही 48 कोस कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थों का विस्तृत चित्रण भी पहली बार किसी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदेश सरकार इस परियोजना के चौथे खंड की डीपीआर पूरी कर इसे केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को भेजने की तैयारी कर रही है।
महाभारतकालीन भारत को आधुनिक तरीके से समझने का मौका
तीन नई गैलरी, तीन मंजिला आधुनिक ब्लॉक
नए प्रस्तावित ब्लॉक में तीन विशेष गैलरियां बनाई जाएंगी। चंडीगढ़ की वास्तुकार टीम द्वारा साइट निरीक्षण पूरा हो चुका है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड भी परियोजना को मंजूरी दे चुका है।
वर्तमान में संग्रहालय की नौ गैलरियों में
● हरियाणा, मथुरा, द्वारका सहित देशभर से मिले पुरातात्विक अवशेष
● श्रीकृष्ण और विष्णु कथाओं पर आधारित कलात्मक मूर्तियां और पांडुलिपियां
● मल्टीमीडिया महाभारत गैलरी में डिजिटल प्रदर्शन
शामिल हैं।
नया विस्तार इन अनुभवों को और अधिक जीवंत बनाएगा।
महाभारतकालीन भारत गैलरी क्यों होगी खास
इस नई गैलरी में उन सभी राज्यों और जनपदों का चित्रण होगा जिन्होंने महाभारत युद्ध में भूमिका निभाई थी। इनमें शामिल होंगे:
गांधार
मद्र
सिंध
तक्षशिला
पांचाल
केकय
कलिंग
शूरसेन
हस्तिनापुर
इंद्रप्रस्थ
विदर्भ
राजगीर
काशी
केदारनाथ
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गैलरी इतिहास और भूगोल को एक साथ समझने का दुर्लभ अवसर देगी। हर स्थल के राजनीतिक, सांस्कृतिक, सैन्य और सामाजिक महत्व को डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों से दिखाया जाएगा।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व प्रोफेसर (काल्पनिक) डॉ. वीरेन्द्र पाल के मुताबिक,
महाभारत को सिर्फ धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक दस्तावेज की तरह देखने का यह महत्वपूर्ण प्रयास है।
48 कोस कुरुक्षेत्र गैलरी का सांस्कृतिक महत्व
कुरुक्षेत्र का 48 कोस क्षेत्र वैदिक काल से लेकर महाभारत काल तक धार्मिक धरोहरों का केंद्र रहा है। यहां देवतीर्थ, ऋषितीर्थ, यक्षतीर्थ और महाभारत से जुड़े सैकड़ों स्थल मौजूद हैं।
नई गैलरी में
● सभी प्रमुख तीर्थों का मानचित्र
● प्रत्येक स्थल का ऐतिहासिक विवरण
● 3D विजुअल अनुभव
शामिल होगा।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह गैलरी धार्मिक पर्यटन को कई गुना बढ़ा देगी।
कृष्ण भक्ति और संत परंपरा को समर्पित गैलरी
यह गैलरी श्रीकृष्ण की भक्ति परंपरा को महाभारत काल से लेकर वर्तमान समय तक जोड़ने का काम करेगी। इसमें दर्शाए जाएंगे:
अक्रूर
सुदामा
उद्धव
विदुर
भीष्म
सूरदास
मीराबाई
चैतन्य महाप्रभु
वल्लभाचार्य
इसके अलावा देश के महत्वपूर्ण मंदिरों जैसे
जगन्नाथ पुरी, द्वारकाधीश, बांके बिहारी, गुरुवयूर, पद्मनाभस्वामी, उदुपी श्रीकृष्ण मंदिर
का भी सुंदर प्रदर्शन होगा।
यह गैलरी भक्तिकाल और कृष्ण साहित्य में रुचि रखने वाले पर्यटकों व शोधकर्ताओं के लिए बेहद मूल्यवान होगी।
पर्यटन बढ़ेगा, जिज्ञासाओं का होगा समाधान
केडीबी के सीईओ पंकज सेतिया और संग्रहालय प्रभारी बलवान सिंह के अनुसार,
वर्तमान में रोज लगभग 1000 पर्यटक संग्रहालय आते हैं।
चौथे खंड के पूरा होने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ सकती है।
उनके मुताबिक,
नया ब्लॉक श्रीकृष्ण, महाभारत और कुरुक्षेत्र से जुड़ी पर्यटकों की कई जिज्ञासाओं का समाधान करेगा।












