अंबाला शहर के रामनगर क्षेत्र में स्थित गद्दी टिल्ला श्री गुरु गोरखनाथ जी मठ में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन हुआ। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार श्री श्री 108 पीर पारसनाथ जी महाराज का जन्मदिन नववर्ष के अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता के साथ मनाया गया। इस आयोजन में हरियाणा सहित कई अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर एक बजे तक मठ परिसर में संकीर्तन और भजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। नारायणगढ़ के अपना म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों ने गुरु महिमा का संगीतमय गुणगान प्रस्तुत किया। भजनों के माध्यम से गुरु शिष्य परंपरा, सेवा भाव और आत्मिक शांति का संदेश दिया गया।
भजन और संकीर्तन से बना आध्यात्मिक माहौल
भजन गायक शेखर त्रिवेदी और उनकी टीम ने ऐसे भजन प्रस्तुत किए जिनमें गुरु भक्ति और जीवन मूल्यों पर विशेष जोर था। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से भजनों का आनंद लिया और संगत में आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की गई।
जन्मदिन पर विशेष आयोजन
जन्मदिन के अवसर पर केक काटा गया और इसके बाद पीर पारसनाथ जी महाराज ने संगत को आशीर्वाद प्रदान किया। प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं में अनुशासन और श्रद्धा का भाव देखने को मिला। इस अवसर पर मठ के उत्तराधिकारी मनसनाथ जी की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
भंडारे और सेवा का महत्व
कार्यक्रम के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे भंडारे समाज में समानता और सेवा भावना को मजबूत करते हैं। मठ से जुड़े सेवादारों के अनुसार, हर वर्ष इस आयोजन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, जो गुरु परंपरा में लोगों की बढ़ती आस्था को दर्शाता है।
दूर दूर से पहुंचे श्रद्धालु
अंबाला के अलावा आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी लोग गुरु दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे नववर्ष की शुरुआत गुरु के आशीर्वाद से करना शुभ मानते हैं। धार्मिक इतिहासकारों के अनुसार, गोरखनाथ परंपरा से जुड़े मठ सदियों से सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र रहे हैं।
क्यों यह आयोजन महत्वपूर्ण है
इस तरह के धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं रहते बल्कि
• सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं
• युवा पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ते हैं
• सेवा और अनुशासन का संदेश देते हैं












