नए साल की शुरुआत के साथ अग्रोहा रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आरडीए में अहम संगठनात्मक परिवर्तन किया गया है। 1 जनवरी को हिसार में हुई घोषणा के तहत डॉ अविनाश यादव को अध्यक्ष और डॉ अमित व्यास को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह निर्णय संगठन को अधिक मजबूत, सक्रिय और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से लिया गया है।
नववर्ष पर क्यों हुआ नेतृत्व परिवर्तन
अग्रोहा आरडीए की स्थापना से लेकर अब तक संगठन का संचालन संस्थापक डॉ सन्नी के मार्गदर्शन में होता रहा है। बीते वर्षों में संगठन का दायरा बढ़ा है और डॉक्टरों से जुड़े मुद्दे भी अधिक जटिल हुए हैं। इसी पृष्ठभूमि में नेतृत्व के पुनर्गठन को जरूरी माना गया।
वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि समय समय पर नेतृत्व परिवर्तन से संगठन में नई सोच आती है और जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा संभव होता है।
नई कार्यकारिणी से क्या उम्मीदें
अध्यक्ष के रूप में डॉ अविनाश यादव
डॉ अविनाश को एक संतुलित और संवाद आधारित नेतृत्व शैली के लिए जाना जाता है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार उनके नेतृत्व में
• रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्याओं पर तेज निर्णय
• प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय
• प्रशिक्षण और कार्य परिस्थितियों पर फोकस
जैसे विषयों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
महासचिव बने डॉ अमित व्यास
डॉ अमित व्यास पहले से ही डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इस भूमिका में उन्होंने देशभर के डॉक्टरों से जुड़े मुद्दों को नीति स्तर तक पहुंचाया है।
चिकित्सा नीति विशेषज्ञों के अनुसार उनके अनुभव से अग्रोहा आरडीए को राष्ट्रीय स्तर की सोच और नेटवर्किंग का लाभ मिल सकता है।
डॉक्टर समुदाय के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारत में हर साल हजारों रेजिडेंट डॉक्टर लंबी ड्यूटी, सीमित संसाधन और कार्यस्थल तनाव का सामना करते हैं। ऐसे में मजबूत संगठनात्मक नेतृत्व डॉक्टरों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉ अमित व्यास के नेतृत्व में डीएमए ने पहले भी
• डॉक्टरों की सुरक्षा के मुद्दे
• कार्यस्थल पर उत्पीड़न
• स्वास्थ्य कर्मियों की एकजुटता
जैसे विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। यही अनुभव अब अग्रोहा आरडीए को भी दिशा देने की उम्मीद है।
आगे की रणनीति क्या हो सकती है
सूत्रों के अनुसार नई टीम
• रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्याओं का डेटा आधारित आकलन
• प्रशासनिक स्तर पर नियमित संवाद
• प्रशिक्षण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम
पर काम कर सकती है।
कार्यक्रम में कौन रहा मौजूद
इस अवसर पर विभिन्न विभागों से जुड़े वरिष्ठ और युवा चिकित्सक भी उपस्थित रहे। इनमें सर्जरी, एनेस्थीसिया और पैथोलॉजी विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। सभी ने नई कार्यकारिणी को समर्थन देने की बात कही।











