Maruti WagonR Flex Fuel : गुरुग्राम और मानेसर में गाड़ियां बनाने वाली देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी ने भारतीय ऑटो सेक्टर में एक नया इतिहास रच दिया है। कंपनी ने कल ही घरेलू बाजार में देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल (WagonR Flex Fuel) को आधिकारिक तौर पर पेश किया। सरकार की तरफ से देश में वैकल्पिक ईंधन और इथेनॉल आधारित मोबिलिटी को लगातार मिल रहे बढ़ावा के बीच मारुति का यह कदम बेहद बड़ा माना जा रहा है। पहली नजर में देखने पर नई वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल और सड़कों पर दौड़ने वाली सामान्य पेट्रोल वैगनआर बिल्कुल एक जैसी नजर आती हैं। लेकिन जब बात कार की अंदरूनी तकनीक, इंजन और ईंधन की आती है, तो इन दोनों ही मॉडलों के बीच जमीन-आसमान का बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
लुक में मामूली बदलाव पर केबिन फीचर्स हैं बिल्कुल समान
दिखावट और फीचर्स की बात करें तो नई वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल को कंपनी ने काफी हद तक रेगुलर पेट्रोल मॉडल जैसा ही रखा है। दोनों ही गाड़ियों का बाहरी ढांचा, केबिन का लेआउट और मिलने वाले फीचर्स की लिस्ट एक समान है। हालांकि पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण कंपनी ने इस फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल को सड़क पर एक अलग पहचान देने के लिए इसकी बॉडी पर आकर्षक हरे और नीले रंग के डिकल्स दिए हैं। गाड़ी की साइड प्रोफाइल पर एक ग्रीन एक्सेंट स्ट्रिप और दरवाजों पर ‘Flex Fuel’ की ब्रांडिंग देखने को मिलती है। केबिन के अंदर ग्राहकों को 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, एंड्रॉइड ऑटो, एप्पल कारप्ले, मैनुअल एसी, रियर पार्किंग सेंसर, एबीएस के साथ ईबीडी और सुरक्षा के लिए 6 एयरबैग जैसे सभी जरूरी फीचर्स पेट्रोल मॉडल की तरह ही मिलेंगे।
समझिए क्या है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और कैसे बदला कार का इंजन
आम जनता के लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को आसान शब्दों में समझना बेहद जरूरी है। यह एक ऐसी आधुनिक ईंधन प्रणाली है जिसमें पेट्रोल के साथ जैविक कचरे, गन्ने और मक्के से तैयार होने वाले इथेनॉल को मिलाकर गाड़ी चलाई जाती है। यह नया मॉडल E20 से लेकर पूरी तरह शुद्ध E100 यानी 100 फीसदी इथेनॉल के मिश्रण पर भी बिना किसी परेशानी के चल सकता है। मारुति ने दोनों ही कारों में 1.2-लीटर का 4-सिलेंडर इंजन और 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया है। लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर के इंजन को इथेनॉल के कड़े प्रभाव को झेलने के लिए खास तौर पर अपग्रेड किया गया है। इसके इंजन में नए जमाने के फ्यूल इंजेक्टर, नया फ्यूल पंप सिस्टम, जंग न लगने वाली खास फ्यूल लाइनें, री-कैलिब्रेटेड ईसीयू (ECU), इथेनॉल सेंसर और हीटेड फ्यूल रेल्स जोड़े गए हैं। कंपनी ने अभी इसके पावर और टॉर्क के आंकड़े तो जारी नहीं किए हैं, लेकिन इथेनॉल की हाई ऑक्टेन रेटिंग की वजह से इसकी परफॉर्मेंस पेट्रोल कार से थोड़ी बेहतर ही मिलेगी।
माइलेज और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला असर
अगर माइलेज की बात करें तो मारुति की मौजूदा पेट्रोल वैगनआर कंपनी के दावों के मुताबिक 23.56 किलोमीटर प्रति लीटर से लेकर 25.19 किलोमीटर प्रति लीटर तक का बंपर माइलेज देती है। दूसरी तरफ फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल के माइलेज के आधिकारिक आंकड़े अभी कंपनी ने सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (Energy Density) सामान्य पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी कम होती है, जिससे फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन का माइलेज पेट्रोल कार से थोड़ा कम रह सकता है। लेकिन राहत की बात यह है कि बाजार में इथेनॉल की कीमत पेट्रोल के मुकाबले काफी कम रहने वाली है। ऐसे में माइलेज थोड़ा कम होने के बावजूद गाड़ी को चलाने का कुल खर्च (Running Cost) सीधे तौर पर घट जाएगा, जो रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सबसे बड़ी बचत साबित होने वाली है।
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