Car Bus AC Tonnage Capacity : उत्तर भारत में जब पारा 45 डिग्री सेल्सियस पार कर जाता है, तब कार और बसों में सफर के दौरान एयर कंडीशनर (AC) ही एकमात्र सहारा बचता है। आज देश के हर मध्यमवर्गीय परिवार की कार और लगभग सभी रूटों पर चलने वाली बसें एसी से लैस हैं। मगर रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को यह अंदाजा नहीं होता कि जिस ठंडी हवा का वे आनंद ले रहे हैं, उसे पैदा करने वाला एसी कितने टन का है। वाहनों की बनावट और जरूरतों के हिसाब से उनके एसी की ताकत को तय किया जाता है।
आखिर टन का गणित क्या है और कारों में यह कैसे काम करता है
अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि एसी का टन उसके वजन से जुड़ा है, जबकि असल में यह उसकी कूलिंग क्षमता को दर्शाता है। तकनीकी भाषा में एक टन का एसी हर घंटे लगभग 12,000 BTU (ब्रिटिश थर्मल यूनिट) गर्मी को केबिन से बाहर निकालता है।
बाजार में दौड़ने वाली सामान्य हैचबैक, सेडान और कॉम्पैक्ट एसयूवी कारों में अमूमन 1 टन से लेकर 1.5 टन के बराबर कूलिंग क्षमता वाला एसी सिस्टम फिट किया जाता है। हालांकि वाहन कंपनियां इन्हें घरेलू एसी की तरह टन के नाम पर नहीं बेचतीं। टोयोटा फॉर्च्यूनर या अन्य बड़ी लग्जरी एसयूवी कारों में केबिन बड़ा होने के कारण 2 टन तक की क्षमता का एसी इस्तेमाल होता है ताकि चंद मिनटों में पूरी कार ठंडी हो जाए।
वोल्वो और सामान्य बसों के एसी में होता है जमीन-आसमान का अंतर
बसों का आंतरिक ढांचा कारों की तुलना में कई गुना बड़ा होता है, इसलिए इनमें घरेलू एसी के मुकाबले बेहद शक्तिशाली सिस्टम की जरूरत पड़ती है। रोडवेज की साधारण एसी बसों में आम तौर पर 4 से 6 टन की क्षमता वाले एसी लगाए जाते हैं।
इसके विपरीत, लंबी दूरी के रूटों पर चलने वाली प्रीमियम वोल्वो और स्कैनिया जैसी बड़ी लग्जरी बसों में 8 से 12 टन तक की क्षमता वाले हैवी-ड्यूटी एसी सिस्टम इंस्टॉल होते हैं। कुछ बेहद बड़े डबल डेकर और स्लीपर कोच वाहनों में यह कूलिंग क्षमता 12 टन से भी ऊपर चली जाती है।
बसों में क्यों पड़ती है इतने बड़े और शक्तिशाली एसी की जरूरत
बस में बड़ा एसी लगाने के पीछे मुख्य कारण यात्रियों की संख्या और वाहन की बनावट है। एक सामान्य बस में एक साथ 30 से लेकर 50 या उससे भी ज्यादा यात्री सफर करते हैं, जिससे शरीर की गर्मी के कारण अंदर का तापमान तेजी से बढ़ता है।
इसके साथ ही बसों में कांच की खिड़कियां बड़ी होती हैं और बस स्टॉप पर बार-बार दरवाजे खुलते हैं, जिससे बाहर की गर्म हवा तुरंत अंदर दाखिल हो जाती है। इस भारी थर्मल लोड को संभालने और पूरे केबिन में एक समान कूलिंग बनाए रखने के लिए ही बसों में इतने बड़े टन के एसी लगाए जाते हैं।
घरेलू एसी से बिल्कुल अलग होती है गाड़ियों के एसी की तकनीक
घर के एसी और गाड़ी के एसी में सबसे बड़ा अंतर उनके पावर सोर्स का होता है। घर का एसी बिजली के कंप्रेसर से चलता है, जबकि कार या बस का एसी सीधे गाड़ी के मुख्य इंजन की शक्ति (क्रैंकशाफ्ट बेल्ट) से अपनी ताकत खींचता है।
यही वजह है कि एसी ऑन करते ही गाड़ी के माइलेज पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा वाहन का एसी लगातार हिलते-डुलते, गड्ढों के झटके सहते और तेजी से बदलते बाहरी वायुमंडल के बीच काम करता है, इसलिए इसकी पाइपलाइन और कंडेनसर को बेहद मजबूत और लचीला बनाया जाता है।
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