नए साल का स्वागत आमतौर पर आतिशबाजी और पार्टियों से जुड़ा होता है, लेकिन मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस CSMT पर इस बार जश्न का अंदाज बिल्कुल अलग रहा। जैसे ही घड़ी ने आधी रात का समय दिखाया, स्टेशन पर खड़ी लोकल ट्रेनों ने एक साथ अपने हॉर्न बजाए। यह दृश्य सिर्फ देखने में खास नहीं था, बल्कि सुनने में भी किसी सामूहिक धुन जैसा लगा।
घटना मुंबई में नए साल की पहली रात की है, जब स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने इस पल को तालियों और उत्साह के साथ महसूस किया।
ट्रेनों के हॉर्न बने जश्न की आवाज
वीडियो में साफ दिखाई देता है कि जैसे ही समय बारह बजता है, प्लेटफॉर्म पर माहौल बदल जाता है। सभी लोकल ट्रेनें एक साथ सिंक्रोनाइज्ड हॉर्न बजाती हैं। आवाज तेज जरूर थी, लेकिन अव्यवस्थित नहीं। कई लोगों ने इसे ट्रेनों की सिम्फनी बताया।
रेलवे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह समन्वय पहले से तय किया जाता है ताकि शोर अव्यवस्था में न बदले और यात्रियों को असहज न करे।
क्यों खास है CSMT का यह नया साल स्वागत
CSMT सिर्फ एक रेलवे स्टेशन नहीं है। यह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है और मुंबई की पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है। यहां हर दिन करीब 30 लाख यात्री लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। ऐसे में नए साल की शुरुआत रेलवे और यात्रियों के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव को दिखाती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परंपरा का मकसद यह दिखाना है कि भारतीय रेलवे सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि शहर की धड़कन है।
कितनी पुरानी है यह परंपरा
यह आयोजन नया नहीं है। CSMT पर दशकों से नए साल की आधी रात को ट्रेनों के हॉर्न एक साथ बजाए जाते हैं। रेलवे स्टाफ इसे मिलकर आयोजित करता है। हर साल कई लोग खास तौर पर इस पल को देखने स्टेशन पहुंचते हैं।
इतिहासकारों का मानना है कि ब्रिटिश दौर में बंदरगाहों और रेलवे यार्ड में ऐसे सामूहिक संकेतों का इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ यह एक सांस्कृतिक परंपरा में बदल गया।
यहां देखें Viral Video
Happy New Year in Indian Railways Style ✨🔥 pic.twitter.com/oaOfdWSc4i
— Trains of India 🇮🇳 (@trainwalebhaiya) December 31, 2025
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ वीडियो
इस साल का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक रेल प्रेमी अकाउंट से साझा किया गया। कुछ ही घंटों में हजारों लोगों ने इसे देखा और अपनी प्रतिक्रिया दी।
लोगों की प्रतिक्रियाओं में खास बातें सामने आईं
• कई यूजर्स ने इसे भारतीय शहरी जीवन की असली तस्वीर बताया
• कुछ ने कहा कि यह जश्न महंगे आयोजनों से ज्यादा दिल के करीब है
• कुछ लोगों ने समुद्री जहाजों के नए साल हॉर्न से इसकी तुलना की
इसका असर और आगे की उम्मीद
ऐसे आयोजन यह दिखाते हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर भी सामूहिक खुशी संभव है, बिना दिखावे के। रेलवे से जुड़े जानकार मानते हैं कि इस तरह की परंपराएं यात्रियों के भरोसे और जुड़ाव को मजबूत करती हैं।
आने वाले समय में अन्य बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों की संभावना जताई जा रही है।












