बारिश के मौसम में पानी बचाने के चक्कर में कई लोग एक बड़ी गलती कर बैठते हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जाता है कि शुद्ध होने के कारण बारिश का पानी इन्वर्टर की बैटरी में डाला जा सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह तरकीब आपकी बैटरी को पूरी तरह बर्बाद कर सकती है और भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा सकती है।
मानसून के दस्तक देते ही तमाम इलाकों में बिजली कटौती की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में घरों में बैकअप के लिए लगा इन्वर्टर सबसे बड़ा सहारा बनता है। बारिश के दिनों में अक्सर लोग पानी की बचत करने के चक्कर में छत से गिरने वाले वर्षा जल को इकट्ठा कर इन्वर्टर की बैटरी में डाल देते हैं। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भी इस घरेलू नुस्खे को सही ठहराया जाता है। तकनीकी जानकारों और बैटरी विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी करते हुए इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है। ऐसा करना बैटरी की लाइफ को सीधे तौर पर खत्म कर देता है।
इन्वर्टर बैटरी को सुचारू रूप से चलाने के लिए किस पानी की आवश्यकता होती है?
घरों और दुकानों में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर इन्वर्टर बैटरियां लेड-एसिड (Lead-Acid) तकनीक पर काम करती हैं। इन बैटरियों के भीतर बिजली को स्टोर करने और रासायनिक प्रतिक्रिया को बनाए रखने के लिए डिस्टिल्ड वॉटर यानी आसुत जल का इस्तेमाल किया जाता है। डिस्टिल्ड वॉटर को एक विशेष वैज्ञानिक प्रक्रिया (वाष्पीकरण और संघनन) के जरिए तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया से पानी में मौजूद सभी प्रकार के मिनरल्स, लवण, आयरन और अन्य अशुद्धियां पूरी तरह बाहर निकल जाती हैं। यह पूरी तरह न्यूट्रल पानी होता है जो बैटरी के अंदरूनी लेड प्लेट्स को सुरक्षित रखता है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: इंस्टाग्राम पर आया कमाल का फीचर, अब बिना डिलीट किए मनचाही जगह पर बदलें अपनी पुरानी पोस्ट
बारिश का पानी इन्वर्टर बैटरी को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
आम जनता को लगता है कि आसमान से सीधे बरसने वाला पानी बिल्कुल साफ और शुद्ध होता है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जब बारिश की बूंदें आसमान से नीचे गिरती हैं, तो वे वायुमंडल में मौजूद जहरीली गैसों, फैक्ट्रियों के धुएं, धूल के कणों और कार्बन से होकर गुजरती हैं। शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाली बारिश के पानी में रसायनों की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब आप इस दूषित पानी को इन्वर्टर की बैटरी में डालते हैं, तो इसमें मौजूद मिनरल्स और रासायनिक तत्व बैटरी के भीतर लगी लेड प्लेटों पर एक परत के रूप में जम जाते हैं। यह परत बैटरी के भीतर होने वाली जरूरी रासायनिक क्रिया को रोक देती है। इसके परिणामस्वरूप बैटरी चार्ज होल्ड करना बंद कर देती है और उसका बैकअप टाइम घटकर आधा रह जाता है। लगातार ऐसा पानी डालने से शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ जाता है और आपको समय से पहले हजारों रुपये खर्च कर नई बैटरी खरीदनी पड़ सकती है।













