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Darsha Amavasya 2025: दर्श अमावस्या 25 जून को पितरों की पूजा, नियम और मान्यताएं

On: June 15, 2025 1:35 PM
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Darsha Amavasya 2025: दर्श अमावस्या 25 जून को पितरों की पूजा, नियम और मान्यताएं
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Darsha Amavasya 2025 Worship of ancestors on June 25, rules and beliefs: दर्श अमावस्या 2025 (Darsha Amavasya 2025) का पवित्र दिन आ रहा है, और इसके साथ ही पितरों का आशीर्वाद लेने का सुनहरा मौका! हर महीने के कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि को आने वाली अमावस्या को दर्श अमावस्या कहते हैं, और इस बार आषाढ़ माह की अमावस्या 25 जून को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं, और उनकी शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य से बड़ा कोई कार्य नहीं। पितृ दोष से मुक्ति और मन की शांति के लिए ये दिन खास है। तो, आइए जानते हैं इस दिन की पूजा के नियम, समय और रहस्यमयी महत्व!

Darsha Amavasya 2025: दर्श अमावस्या का समय और महत्व

पंचांग के अनुसार, दर्श अमावस्या 2025 (Amavasya date) 24 जून, बुधवार को शाम 6:59 बजे शुरू होगी और 26 जून, गुरुवार को शाम 4:00 बजे खत्म होगी। उदयातिथि के हिसाब से मुख्य पूजा 25 जून को होगी। ये दिन पितरों की आत्मा को शांति देने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। मान्यता है कि इस दिन किया गया तर्पण और दान कई गुना फल देता है। पितृ दोष या कालसर्प दोष से पीड़ित लोग इस दिन विशेष उपाय कर सकते हैं।

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पूजा के नियम और विधान

दर्श अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। गंगा जैसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ये मुमकिन न हो, तो पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं। स्वच्छ कपड़े पहनकर सूर्य देव को लाल चंदन, अक्षत और फूलों के साथ अर्घ्य दें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल और कुशा लेकर पितरों का स्मरण करें। गोत्र का नाम लें और पितृ तीर्थ से जल चढ़ाएं। पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें। पीपल के पेड़ पर जल और कच्चा दूध चढ़ाएं, सात परिक्रमा करें और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं (Pitru Puja). भगवान विष्णु, शिव और मां लक्ष्मी की पूजा करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपें।

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दान-पुण्य और मान्यताएं

दर्श अमावस्या पर दान का विशेष महत्व है। गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को गेहूं, चावल, तिल, गुड़ या वस्त्र दान करें। काले तिल का दान पितृ दोष निवारण में प्रभावी है। गाय को हरा चारा खिलाएं। चंद्र देव की पूजा करें, भले ही वे दिखाई न दें। ये पूजा मन को शांति देती है। अमावस्या की रात नकारात्मक ऊर्जाएं सक्रिय होती हैं, इसलिए पूजा और दान से इनका नाश होता है। कालसर्प दोष वालों के लिए ये दिन उपायों के लिए उत्तम है (spiritual rituals). पितरों का आशीर्वाद लेने का ये मौका न चूकें!

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मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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