Home loan interest rate Banks give half relief, customers face increasing problems: आरबीआई ने पांच साल बाद लगातार दो बार में ब्याज दरों में 0.5% की कटौती की। इससे लोगों को उम्मीद थी कि होम और कार लोन की ईएमआई में राहत मिलेगी। लेकिन बैंकों ने इसका पूरा लाभ नहीं दिया।
सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने ग्राहकों को होम लोन की दरों में आधा यानी 0.25% का ही लाभ पहुंचाया। चाहन लोन में से कोई कटौती की ही नहीं। वहीं, निजी बैंकों ने अब तक आवास और कार दोनों के ही कर्ज की दरों में कोई कटौती नहीं की है।
Home loan interest rate: आखिर क्या हो रहा है झोल?
ऐसे में कर्ज लेने वाले ग्राहक अपनी बैंकों से सवाल कर रहे हैं. कि कर्ज की ईएमआई कब घटेंगी। बैंकों के अभिन्नरियों के पास कोई जवाब ही नहीं है। देश में होम लोन के 2.2 करोड़ और वाइन लोन के 60 लाख सक्रिय ग्राहक हैं।
चार महीने में बैंकों ने केवल एक बार ही अपनी कर्ज की दरों में कटौती की है। ये यह दावा करते हैं कि जल्द कर्ज की दरों में और कटोती करेंगे। उनकी हर महीने की देरी से होम लोन के ग्राहकों पर 1760 करोड़ रुपए और ऑटो लोन के ग्राहकों पर 105 करोड़ रु. का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
एक्सपर्ट का कहना है कि संभव है कि बैंक फंड की लागत बढ़ने का चहना बनाकर मौजूदा ग्राहकों के कर्ज की दर में ज्यादा बदलाव ही न करें। आने वाले त्योहारी सीजन में केवल नए की की ही इसका लाभ दें।
एक्सिस बैंक बीओबी नोट
आंकडे प्रतिशत में। ब्याज दरें फाइनेशियल एडवाइजर फर्म बैंक बाजार व पैसा बाजार के आधार पर। दरें लोन अवधि, सिक्लि स्कोर व विशेष स्कीम्स के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।
तो हर माह 1600 रु. का लाभ होता
• 20 साल के लिए 50 लाख रु. के होम लोन पर 0.25% व्याज और घटता ते ईएमआई में अधिकतम 1600 रु. का फायदा होता। पूरी लान अवधि में इसका फायदा 3.8 लाख रुपए तक होता – 5 चप के वाहन पर यह फायदा 150 रूपए तक प्रति माह होता।
• आरबीआई के अनुसार, 2023-24 में देश में कुल 25 लाख लोगों ने करीब 24 लाख करोड़ रुपए का होम लोन लिया। 2024- 25 में इसमें 72% की ग्रोथ आई। यानी लोन लेने वालों की संख्या 28 लाख और राशि करीब 27 लाख करोड़ रुपए की रही।
नियम की आड… क्योंकि तत्काल ब्याज दरें घटाने की बाध्यता नहीं
आरबीआई ने ब्याज दरों में जो कटौती की है. देर-सबेर उसका फायदा ग्राहकों को मिलना ही है। लेकिन इसमें कितना समय लगेगा, यह तय नहीं। आरबीआई द्वारा की गई कटौती के बाद बैंक अपनी जया दरों में कमी कर चुके हैं।
लेकिन कर्ता की दरों में उतनी कटोरी से बच रहे हैं. उनका तर्क है कि घटी जमा दरों का असर एफडी के रिन्युअल पर दिखेगा लेकिन कर्ज की दर घटाने पर उसका असर तत्काल पूरे लोग पोर्टफोलिये पर नजर आएगा।
नतीजा उनका नेट इंट्रस्ट मार्जिन घट जाएगा। फंड्स की लागत बढ़ेगी। यह सार एडजस्टमेंट में बैंक समय लेते हैं। केंद्र और आरबीआई की ओर से नियमों में ऐसी बाध्यता नहीं है कि ब्याज दरों में कटौती का लाभ तुरंत देना है।












