अंबाला, 21 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। अक्सर लंबी दूरी की रेल यात्रा के दौरान हमारा मन करता है कि बीच में पड़ने वाले किसी प्रसिद्ध शहर को देख लिया जाए, लेकिन नया टिकट लेने के झंझट और पैसों की बर्बादी के डर से हम ऐसा नहीं कर पाते। भारतीय रेलवे का ‘ब्रेक जर्नी’ नियम आपकी इस समस्या का सटीक समाधान है। यह नियम उन यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो एक ही टिकट पर अपनी यात्रा को टुकड़ों में बांटना चाहते हैं। हालांकि, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए रेलवे ने कुछ कड़े और स्पष्ट नियम तय किए हैं, जिनकी जानकारी न होने पर आपको बिना टिकट मानकर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
500 किमी की शर्त है सबसे अहम
रेलवे के नियमों के मुताबिक, ब्रेक जर्नी की सुविधा तभी मिलती है जब आपके टिकट की कुल दूरी 500 किलोमीटर से अधिक हो। नियम यह भी कहता है कि पहला ब्रेक लेने से पहले आपको कम से कम 500 किमी का सफर तय करना अनिवार्य है। उदाहरण के तौर पर, यदि आपका टिकट 800 किमी का है और आप 400 किमी पर उतरना चाहते हैं, तो रेलवे इसकी अनुमति नहीं देगा। आपको कम से कम 501 किमी या उससे आगे ही पहला हॉल्ट लेने का अधिकार मिलेगा। 1000 किमी से अधिक की दूरी होने पर आप अपनी यात्रा के दौरान दो अलग-अलग स्टेशनों पर रुकने का आनंद ले सकते हैं।
स्टेशन मास्टर का सिग्नेचर है जरूरी
यदि आप नियमों के तहत किसी स्टेशन पर ब्रेक ले रहे हैं, तो गाड़ी से उतरने के बाद सबसे पहले स्टेशन मास्टर या टिकट कलेक्टर के पास जाएं। अपने टिकट के पीछे उस स्टेशन का नाम, तारीख और स्टेशन मास्टर के हस्ताक्षर व मुहर लगवाना अनिवार्य है। यह इस बात का प्रमाण होता है कि आपने आधिकारिक तौर पर ब्रेक जर्नी ली है। यदि आप बिना एंडोर्समेंट (Endorsement) के दोबारा ट्रेन पकड़ते हैं, तो टीटीई आपको बिना टिकट यात्री मान सकता है और आपसे दोबारा किराया व जुर्माना वसूला जा सकता है।
इन ट्रेनों में नहीं मिलेगा फायदा
यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ब्रेक जर्नी का नियम सभी ट्रेनों पर लागू नहीं होता। राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में यह सुविधा नहीं मिलती क्योंकि इनका किराया पॉइंट-टू-पॉइंट (शुरुआती से आखिरी स्टेशन तक) आधार पर लिया जाता है। इसके अलावा, यदि आप दो ट्रेनों के बीच तालमेल बिठाने के लिए किसी स्टेशन पर 24 घंटे से कम रुकते हैं, तो उसे ‘ब्रेक जर्नी’ नहीं बल्कि ‘ट्रांजिट’ माना जाता है। ऐसे में आपको किसी एंडोर्समेंट की जरूरत नहीं होती।
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