उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कैंची धाम 15 जून को अपने स्थापना दिवस पर बाबा नीम करोली के जयकारों से गूंजने के लिए तैयार है। इस ऐतिहासिक दिन पर देश और दुनिया से एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आश्रम प्रबंधन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस पावन अवसर पर सुबह से ही हनुमान चालीसा का पाठ, विशेष भजन-कीर्तन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी, जिसके बाद भक्तों को बाबा का पसंदीदा मालपुआ महाप्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
कैंची धाम आश्रम की स्थापना कब हुई थी?
संत नीम करोली बाबा ने 15 जून 1962 को कैंची धाम आश्रम की स्थापना की थी। बाबा के चमत्कारों, उनके सरल जीवन और गहरे आध्यात्मिक संदेशों के कारण यह स्थान दशकों से करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। आम भक्तों के अलावा दुनिया की कई नामचीन हस्तियां भी बाबा के दरबार में शीश नवा चुकी हैं, जिससे इस स्थान की ख्याति वैश्विक स्तर पर फैली है।
कैंची धाम में स्थापना दिवस पर महाआरती और भोग का समय क्या है?
स्थापना दिवस पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। आश्रम में प्रतिदिन दो समय नियमित आरती होती है, जिसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। स्थापना दिवस के मौके पर भी इसी तय समय पर महाआरती की जाएगी:
सुबह की आरती का समय: सुबह 6:45 बजे बाबा दर्शन हॉल में और ठीक सुबह 7:00 बजे मुख्य मंदिर में आरती संपन्न होगी।
शाम की आरती का समय: शाम 6:45 बजे बाबा दर्शन हॉल में और शाम 7:00 बजे मुख्य मंदिर में संध्या आरती की जाएगी।
बाबा नीम करोली को किस चीज का भोग लगाया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा नीम करोली को मुख्य रूप से मालपुए का भोग अत्यंत प्रिय है। स्थापना दिवस के पावन अवसर पर मुख्य पूजा के बाद बाबा को विशेष रूप से तैयार किए गए मालपुए अर्पित किए जाएंगे। इसके तुरंत बाद मंदिर परिसर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के बीच इस प्रसिद्ध मालपुए को महाप्रसाद के रूप में बांटा जाएगा, जिसके लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: बारिश में भीग गया है मोबाइल फोन? भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, वरना हमेशा के लिए उड़ जाएगा डेटा
कैंची धाम का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है?
हनुमान भक्तों और साधकों के लिए कैंची धाम को बेहद पवित्र और जाग्रत स्थल माना जाता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से मन्नत मांगता है, बाबा उसकी प्रार्थना अवश्य पूरी करते हैं। देश-विदेश से लोग यहां केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति, ध्यान और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति के लिए आते हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि बाबा की कृपा से जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।










