देश के लाखों घरों में लोगों की एक बेहद आम आदत बन चुकी है। लोग अपने स्मार्टफोन को चार्जिंग से हटाने के बाद मोबाइल तो जेब में रख लेते हैं, लेकिन दीवार के बोर्ड में लगे चार्जर का स्विच बंद करना भूल जाते हैं या जानबूझकर छोड़ देते हैं। घरों में अक्सर इस बात पर बहस होती है कि क्या खाली चार्जर सच में बिजली की खपत करता है। विज्ञान और तकनीकी आंकड़ों ने अब साफ कर दिया है कि यह छोटी सी लापरवाही आपके घर के बजट और सुरक्षा दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
अक्सर लोग इसे मामूली बात समझकर टाल देते हैं, लेकिन तकनीकी तौर पर यह बिजली की सीधी बर्बादी है। जब भी कोई चार्जर बिना फोन के प्लग में ऑन रहता है, तो वह चुपचाप बिजली खींचता रहता है। ऊर्जा विशेषज्ञ और वैज्ञानिक इस छिपी हुई बिजली की खपत को तकनीकी भाषा में ‘वैम्पायर ड्रा’ (Vampire Draw), ‘फैंटम लोड’ या ‘नो-लोड पावर’ कहते हैं। यह बिजली आम आदमी की नजरों से बची रहती है, लेकिन आपके घर के बिजली मीटर की रीडिंग को लगातार बढ़ाती रहती है।
क्या बिना फोन के भी चार्जर बिजली सोखता है? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
उपभोक्ताओं को यह समझना होगा कि आधुनिक स्मार्टफोन के चार्जर के भीतर एक बेहद सूक्ष्म ट्रांसफार्मर और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सर्किट काम करता है। जब दीवार का स्विच ऑन होता है, तो यह सर्किट आपके घर में आने वाली 220 वोल्ट की हाई-वोल्टेज बिजली को मोबाइल बैटरी के अनुकूल 5 वोल्ट या 9 वोल्ट की लो-वोल्टेज बिजली में बदलने का काम शुरू कर देता है।
सर्किट का यह काम लगातार जारी रहता है, चाहे आगे कोई फोन चार्जिंग के लिए लगा हो या नहीं। चूंकि बिजली का रूपांतरण बिना रुके चलता रहता है, इसलिए चार्जर के भीतर मौजूद कंपोनेंट्स लगातार सक्रिय रहते हैं। यही वजह है कि खाली रहने पर भी चार्जर बोर्ड से लगातार करंट खींचता रहता है और इस ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा गर्मी (Heat) के रूप में हवा में बर्बाद हो जाता है।
कितनी बिजली खाता है खाली चार्जर और सालभर में कितना आता है खर्च?
अगर आंकड़ों की बात करें तो एक सामान्य और ब्रांडेड कंपनी का चार्जर जब बिना मोबाइल के खाली ऑन रहता है, तो वह लगभग 0.1 से 0.5 वॉट बिजली प्रति घंटा खर्च करता है। देखने में यह मात्रा बेहद कम लगती है, लेकिन जब हम इसकी चौबीस घंटे और सालभर की गणना करते हैं, तो आंकड़ा चौंकाने वाला सामने आता है।
यदि एक चार्जर को साल के 365 दिन और 24 घंटे लगातार खाली ऑन छोड़ दिया जाए, तो यह तकरीबन 1 से 4 यूनिट (kWh) बिजली की खपत अकेले ही कर लेता है। भारत के विभिन्न राज्यों में बिजली की औसत दरें लगभग ₹6 से ₹8 प्रति यूनिट के बीच हैं। इस लिहाज से देखें तो एक चार्जर को सालभर ऑन छोड़ने पर ₹10 से ₹30 का सीधा खर्च आता है। अगर किसी घर में 4 से 5 सदस्य हैं और सभी के चार्जर ऐसे ही ऑन रहते हैं, तो यह सीधे तौर पर आपकी जेब पर सालाना ₹150 तक की चपत लगाता है।
बिजली की बर्बादी से बड़ा है सुरक्षा का खतरा, लग सकती है घर में आग
पैसे का नुकसान भले ही आपको सीमित लगे, लेकिन खाली चार्जर को प्लग में ऑन छोड़ना आपके पूरे परिवार की सुरक्षा को दांव पर लगा देता है। लगातार करंट दौड़ने से चार्जर के अंदरूनी हिस्से लगातार गर्म होते रहते हैं, जिससे उसकी कार्यक्षमता कम होती है और चार्जर बहुत जल्दी खराब हो जाता है। सबसे बड़ा जोखिम लोकल या खराब क्वालिटी के चार्जर के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है।
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गर्मी के मौसम में या बिजली के वोल्टेज में अचानक उतार-चढ़ाव (Spike) होने पर इन लोकल चार्जरों में ओवरहीटिंग की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इस स्थिति में चार्जर के अंदरूनी सर्किट पिघल सकते हैं, जिससे घर के बिजली बोर्ड में शॉर्ट सर्किट होने या आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। देश भर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां चार्जर फटने से बड़े हादसे हुए हैं।
छोटे बच्चों और पालतू जानवरों के लिए जानलेवा बन सकती है यह लापरवाही
इस आदत का एक और बेहद संवेदनशील और डरावना पहलू भी है, जो सीधे आपके मासूम बच्चों और पालतू जानवरों से जुड़ा है। अक्सर देखा जाता है कि चार्जर प्लग में लगा रहता है और उसकी केबल का दूसरा सिरा नीचे फर्श या बेड पर लटकता रहता है। यदि स्विच ऑन है, तो उस केबल के पिन वाले सिरे में लगातार करंट मौजूद रहता है।
घुटनों के बल चलने वाले छोटे बच्चे या घर में पाले गए कुत्ते-बिल्ली अक्सर खेलते हुए इस लटकती हुई केबल को अपने मुंह में दबा लेते हैं। केबल का सिरा मुंह की लार के संपर्क में आते ही शॉर्ट हो सकता है, जिससे मासूमों को गंभीर इलेक्ट्रिक शॉक (बिजली का झटका) लग सकता है। किसी भी बड़े हादसे से बचने के लिए फोन को हटाते ही चार्जर का स्विच तुरंत बंद करना ही एकमात्र सबसे सुरक्षित उपाय है।













