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Shayari on old age: बुढ़ापे पर शायरी, ढलती उम्र के दर्द को बयां करते हैं ये अल्फाज

On: July 3, 2025 6:52 PM
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Shayari on old age: बुढ़ापे पर शायरी, ढलती उम्र के दर्द को बयां करते हैं ये अल्फाज
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Shayari on old age umar par shayari in hindi old age quotes sad shayari on badhti umar in hindi budhapa par shayari: बुढ़ापे पर शायरी सुनते ही मन में एक अजीब सी उदासी और गहराई का एहसास उभरता है। कहते हैं, उम्र का कारवां रुकता नहीं, जवानी की रंगीनियां धीरे-धीरे यादों में सिमट जाती हैं, और बुढ़ापा चुपके से दस्तक दे देता है। कोई इसे जिंदगी का सुनहरा पड़ाव मानता है, तो किसी के लिए ये अकेलेपन और मायूसी का सबब बन जाता है। शायरों ने अपनी नाजुक कलम से बुढ़ापे की इस सच्चाई को ऐसे बयां किया है कि हर शब्द दिल को छू जाता है। आइए, ढलती उम्र के इस सफर को कुछ चुनिंदा शायरियों के जरिए महसूस करें, जो जिंदगी के इस अनकहे सच को बयां करती हैं।

Shayari on old age

दस्तक तो बहुत दे रहा है बुढ़ापा,
पर ज़िद है कि हम दरवाज़ा न खोलेंगे।

मैं तो ‘मुनीर’ आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ,
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में।

तमाम उम्र खुशी की तलाश में गुजरी,
तमाम उम्र तरसते रहे खुशी के लिए।

उम्र का सफर वक्त की फिसलन

वक्त की रफ्तार को कौन रोक पाया है? जैसे नदी बहती है, वैसे ही उम्र भी फिसलती चली जाती है। एक शायर ने खूब कहा, “फिसल पर वक्त के फर्श पर उम्र ढल जाती है, कई बार बिना जिए भी जिंदगी गुजर जाती है।” ये पंक्तियां उस हकीकत को बयां करती हैं, जहां इंसान जिंदगी की भागदौड़ में इतना खो जाता है कि जब बुढ़ापा आता है, तो उसे एहसास होता है कि जिंदगी तो कब की निकल गई। बुढ़ापा वो दौर है, जब हर कदम पर वक्त की चाल याद दिलाती है कि अब धीमे चलना है, पर मन तो फिर भी जवानी की राह तलाशता है।

Budhapa par shayari

उम्र बिता दिया हमने बच्चों की फिक्र करने में,
अब बच्चे व्यस्त हैं हमारी कमियों का जिक्र करने में।

वक्त रहता नहीं कहीं टिक कर,
आदत इसकी भी आदमी सी है।

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लड़कपन खेल में खोया,
जवानी नींद भर सोया,
बुढ़ापा देखकर रोया।

चाहे जितना ख़याल रक्खो मिरा
उम्र मेरी है मुख़्तसर यारो
– ख़ान रिज़वान

मेरी सारी उम्र में
एक ही कमी है तू
– नासिर काज़म

बच्चों की दुनिया, बुजुर्गों का अकेलापन

कितना दर्द छिपा है उन मां-बाप के दिल में, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों को संवारने में गुजार दी, और बदले में मिला सिर्फ अकेलापन। एक शायरी में ये दर्द कुछ यूं बयां हुआ, “उम्र बिता दिया हमने बच्चों की फिक्र करने में, अब बच्चे व्यस्त हैं हमारी कमियों का जिक्र करने में।” आज की भागदौड़ भरी दुनिया में बुजुर्ग अक्सर उपेक्षित हो जाते हैं। बुढ़ापा सिर्फ शरीर की कमजोरी नहीं, बल्कि मन की उस तन्हाई का नाम है, जब अपनों की बेरुखी दिल को चुभती है। ये शायरियां हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम अपने बुजुर्गों का सचमुच ख्याल रखते हैं?

Shayari on badhti umar in hindi

उस ने भूले से क्या नज़र डाली
उम्र सारी ख़राब कर डाली
– अज्ञात

तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था
– सलीम कौसर

मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है
– जोश मलीहाबादी

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ढलती उम्र पर शायरी

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं,
जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला।

सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा,
मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर।

जवानी की यादें, बुढ़ापे की हकीकत

जवानी की वो रंगीनियां, वो बेफिक्री, और वो सपने सब कुछ बुढ़ापे में एक धुंधली याद बनकर रह जाता है। एक शायर ने इसे कुछ यूं कहा, “कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं, जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला।” बुढ़ापे में इंसान अक्सर अपने अतीत में खो जाता है, जब चेहरा जवां था और सपने बड़े थे। लेकिन बुढ़ापा वो आइना है, जो हकीकत दिखाता है। “मैं तो ‘मुनीर’ आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ, ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में।” ये पंक्तियां उस हैरानी को बयां करती हैं, जब इंसान अपनी बदलती सूरत को देखकर अतीत को याद करता है।

Umar par shayari in hindi

हर निवाला उस का अब तो तल्ख़ है
उम्र नेमत थी मगर जी भर गया
– शाद अज़ीमाबादी

‘नूह’ को चैन उम्र भर न मिला
क्या हों वो अपने इम्तिहान से ख़ुश
– नूह नारवी

उम्र ‘हैरत’ दोपहर की धूप थी
शाम अब आई है अब जाते हैं घर
– हैरत फ़र्रुख़ाबादी

बुढ़ापे की जिद, हार नहीं मानूंगा!

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बुढ़ापा भले ही शरीर को कमजोर कर दे, लेकिन कई बार मन की जिद उसे हराने नहीं देती। एक शायरी में ये जोश कुछ यूं झलकता है, “दस्तक तो बहुत दे रहा है बुढ़ापा, पर ज़िद है कि हम दरवाज़ा न खोलेंगे।” ये पंक्तियां उस हौसले को दिखाती हैं, जो बुढ़ापे में भी इंसान को जवान बनाए रखता है। बुढ़ापा सिर्फ उम्र का पड़ाव नहीं, बल्कि अनुभवों का खजाना है। ये वो वक्त है, जब जिंदगी की हर सीख एक कहानी बनकर सामने आती है। शायरों के ये अल्फाज हमें सिखाते हैं कि बुढ़ापे को गले लगाकर भी जिंदगी को खुलकर जीया जा सकता है।

Old Age Shayari on Badhti Umar

फिसल पर वक्त के फर्श पर उम्र ढल जाती है,
कई बार बिना जिए भी जिंदगी गुजर जाती है।

गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तन्हा
– अनवर शऊर

दिन ख़ुशी के निकाल कर देखे
उम्र का हर बरस उदासी है
– जुनैद अख़्तर

तारीखों में धीरे-धीरे व्यतीत हो रहे हैं हम,
आज हैं लेकिन हर पल अतीत हो रहे हैं हम।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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