चंद्र ग्रहण के साथ होगी श्राद्ध की शुरुआत, पंचकूला। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में 15-16 दिनों की अवधि पितरों की आत्मा की शांति के लिए निर्धारित की जाती है। इसे पितृ पक्ष कहा जाता है। इस दौरान परिजन अपने दिवंगत पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं। सेक्टर-16 मंदिर के पंडित ललित मोहन ने बताया कि पितृ पक्ष हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू आश्विन अमावस्या तक चलता है। इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर से आरंभ होगा। खास बात यह है कि इसकी शुरुआत चंद्र ग्रहण और समापन सूर्य ग्रहण के साथ हो रहा है। साथ ही इस बार पितृ पक्ष की अवधि केवल 14 दिनों की ही रहेगी।
यह जानकारी पंचकूला सेक्टर-11 के मंदिर में हुई आदर्श देवज्ञ ब्राह्मण सभा की बैठक में दी गई। बैठक में प्रधान पं. चंडीप्रसाद, पं. आनंद दूबे, पं. संजीव भट्ट, पं. जगदीश सेमवाल, पं. मोहन सेमवाल, पं. हीरामणी और पं. शिव कुमार भी उपस्थित रहे।
पितृपक्ष की महत्वपूर्ण तिथियां
पंचकूला के सेक्टर-11 मंदिर में हुई आदर्श देवज्ञ ब्राह्मण सभा की बैठक में पितृपक्ष की तिथियों की जानकारी दी गई। 7 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध होगा, जिसमें नाना-नानी का तर्पण किया जाएगा। 8 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध, 12 सितंबर को पंचमी और षष्ठी एक साथ, 15 सितंबर को मातृ नवमी, 18 सितंबर को संन्यासियों का श्राद्ध, 20 सितंबर को चतुर्दशी पर दुर्घटना या शस्त्र से मृत लोगों का श्राद्ध और 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी, जिसके साथ विसर्जन होगा।
ग्रहण और सूतक का क्या होगा असर
पंडित ललित मोहन ने बताया कि 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण रहेगा। दोपहर 1 बजे से सूतक लग जाएगा और रात 9:57 से 1:26 बजे तक ग्रहण काल रहेगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और 8 सितंबर सुबह 5 बजे गंगाजल से स्नान और आरती के बाद ही खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि सूतक से पहले भोजन की वस्तुओं में तुलसी या कुश डालना चाहिए, ताकि ग्रहण का असर न पड़े। ग्रहण काल में भगवान का स्मरण और चंद्र मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। ग्रहण समाप्त होने के बाद सुबह जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करना चाहिए।













