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फरवरी 2026 में लगेगा वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण, कहां दिखेगा प्रभाव

On: दिसम्बर 17, 2025 8:11 पूर्वाह्न
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फरवरी 2026 में लगेगा वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण, कहां दिखेगा प्रभाव
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साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को पड़ रहा है। यह ग्रहण फाल्गुन मास की अमावस्या के दिन लगेगा और खगोल विज्ञान की दृष्टि से खास माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान ऐनुलर सोलर इकलिप्स दिखाई देगा, जिसे आम भाषा में सूर्य के चारों ओर आग की अंगूठी जैसा दृश्य कहा जाता है।

फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण कब और कैसा होगा

यह सूर्य ग्रहण मंगलवार 17 फरवरी 2026 को लगेगा। इस दिन चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेगा, लेकिन उसका आकार पूरी तरह सूर्य को ढकने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसी वजह से सूर्य के किनारे चमकदार वलय की तरह नजर आएंगे।

यह क्यों खास है

ऐनुलर सूर्य ग्रहण अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है
इसमें सूर्य पूरी तरह अंधकारमय नहीं होता
खगोल वैज्ञानिकों के लिए यह सूर्य की बाहरी परत के अध्ययन का मौका देता है

कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण

इस ग्रहण का पूर्ण ऐनुलर रूप अंटार्कटिका में सबसे स्पष्ट दिखाई देगा। इसके अलावा
दक्षिणी अफ्रीका
मेडागास्कर
दक्षिणी दक्षिण अमेरिका
के कुछ हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा।

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क्या भारत में दिखेगा फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी कारण
भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा
धार्मिक गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा

भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की अवधि लगभग
दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से
शाम 5 बजकर 27 मिनट 46 सेकंड तक
बताई गई है, हालांकि यह केवल खगोलीय गणना के लिए है।

सूर्य ग्रहण कैसे बनता है

जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी आंशिक या पूरी तरह ढक जाती है, तब सूर्य ग्रहण बनता है।
ऐनुलर ग्रहण तब होता है जब
चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ा दूर होता है
उसका आकार सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता

ज्योतिष के अनुसार ग्रहण का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में घटित होगा।

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किन राशियों पर असर माना जाता है

कुंभ राशि वालों पर प्रभाव अधिक बताया जाता है
जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्र प्रमुख स्थिति में हों
ऐसे लोग कामकाज और निजी जीवन में बदलाव महसूस कर सकते हैं

ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय आत्ममंथन और योजनाओं की समीक्षा के लिए उपयुक्त माना जाता है।

वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण में अंतर

वैज्ञानिक रूप से सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है
धार्मिक रूप से इसे सावधानी और आत्मसंयम से जोड़ा जाता है

भारत में दृश्य न होने के कारण धार्मिक नियम लागू नहीं होंगे, लेकिन आस्था रखने वाले लोग मानसिक रूप से सतर्क रहते हैं।

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क्यों महत्वपूर्ण है यह जानकारी

सूर्य ग्रहण से जुड़ी सही जानकारी
अफवाहों से बचाती है
धार्मिक भ्रम दूर करती है
खगोल विज्ञान में रुचि बढ़ाती है

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे खगोलीय घटनाक्रमों को वैज्ञानिक नजरिए से समझना जरूरी है।

आगे क्या

2026 में इसके बाद भी खगोलीय घटनाएं होंगी जिनमें चंद्र ग्रहण और अन्य सूर्य ग्रहण शामिल हैं। खगोल प्रेमियों के लिए यह वर्ष काफी रोचक रहने वाला है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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