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Vikat Sankashti Chaturthi 2025: विकट संकष्टी चतुर्थी गणेश जी की कृपा पाने के लिए आज रात 10 बजे से पहले करें ये खास पूजा

On: अप्रैल 16, 2025 6:53 पूर्वाह्न
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Vikat Sankashti Chaturthi 2025: विकट संकष्टी चतुर्थी गणेश जी की कृपा पाने के लिए आज रात 10 बजे से पहले करें ये खास पूजा
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Vikat Sankashti Chaturthi 2025 Vrat Katha Moonrise Time Today 16 April 2025: वैशाख मास की विकट संकष्टी चतुर्थी, जो 16 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी, सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है। यह पर्व भगवान गणेश की असीम कृपा का प्रतीक है, जो भक्तों के जीवन से कष्टों को दूर करता है और उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इस दिन व्रत और कथा पाठ का विशेष महत्व है। आइए, इस पर्व की महिमा, पूजा विधि और प्रेरक कथा को विस्तार से जानें।

Vikat Sankashti Chaturthi 2025: विकट संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में विकट संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से गणपति भक्तों के सभी दुखों को हर लेते हैं। चाहे वह आर्थिक परेशानी हो, पारिवारिक कलह हो, या मनोकामना पूर्ति की इच्छा, गणेश जी की कृपा से सब संभव हो जाता है। इस दिन चंद्र दर्शन का भी विशेष महत्व है, जो रात 10 बजे के आसपास होगा। चंद्रमा को अर्घ्य देने और कथा पाठ करने से व्रत पूर्ण होता है।

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पूजा विधि: कैसे करें गणेश जी की आराधना?

विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा सरल लेकिन प्रभावशाली है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गणेश जी की मूर्ति या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें। दीप, धूप और फूलों से उनकी पूजा करें। गणेश जी को मोदक, लड्डू या गुड़ का भोग लगाएं। इसके बाद गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें। शाम को चंद्र दर्शन से पहले विकट संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें। रात 10 बजे के आसपास चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। यह विधि गणेश जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।

विकट संकष्टी चतुर्थी की प्रेरक कथा

एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक गांव में धर्मकेतु नाम का एक विद्वान ब्राह्मण रहता था। उसकी दो पत्नियां थीं—सुशीला और चंचला। सुशीला धार्मिक और व्रत-उपवास में विश्वास रखने वाली थी, जबकि चंचला को धर्म-कर्म में कोई रुचि नहीं थी। सुशीला की भक्ति के कारण वह कमजोर हो गई थी, लेकिन उसका मन गणेश जी के प्रति अटल था। समय के साथ सुशीला को एक पुत्री और चंचला को एक पुत्र की प्राप्ति हुई। चंचला ने सुशीला का मजाक उड़ाते हुए कहा कि इतने व्रत करने के बावजूद उसे पुत्री मिली, जबकि उसने कुछ न किया फिर भी पुत्र प्राप्त हुआ।

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इस बात से दुखी सुशीला ने विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत और भी श्रद्धा से किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उन्हें पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया। हालांकि, इसके बाद धर्मकेतु की मृत्यु हो गई, और सुशीला ने अपने बच्चों का अकेले पालन-पोषण किया। उसका पुत्र बड़ा होकर बहुत ज्ञानी और समृद्ध हुआ। यह देख चंचला को जलन हुई और उसने सुशीला की पुत्री को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन गणेश जी ने सुशीला की पुत्री की रक्षा की। अपनी गलती का एहसास होने पर चंचला ने सुशीला से क्षमा मांगी और उसकी सलाह पर विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत शुरू किया। इसके बाद चंचला के परिवार पर भी गणेश जी की कृपा बरसने लगी।

क्यों जरूरी है कथा पाठ?

विकट संकष्टी चतुर्थी की कथा भक्ति, विश्वास और पश्चाताप की सीख देती है। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती। कथा पाठ करने से न केवल व्रत पूर्ण होता है, बल्कि मन में सकारात्मकता और श्रद्धा का संचार होता है। यह कथा परिवार में एकजुटता और धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा देती है।

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विकट संकष्टी चतुर्थी 2025 का यह पर्व हमें गणेश जी की कृपा पर भरोसा करना सिखाता है। चाहे जीवन में कितनी भी मुश्किलें हों, सच्ची भक्ति और सही कर्म हमेशा फल देते हैं। इस दिन अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा करें, कथा सुनें और चंद्र दर्शन के साथ व्रत को पूर्ण करें। यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने का एक सुनहरा अवसर है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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