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सरकार के नए आदेश से WhatsApp यूजर्स की दिक्कत बढ़ेगी क्या जानें पूरा बदलाव

On: नवम्बर 30, 2025 9:23 अपराह्न
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सरकार के नए आदेश से WhatsApp यूजर्स की दिक्कत बढ़ेगी क्या जानें पूरा बदलाव
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भारत सरकार ने WhatsApp, Telegram और Signal के लिए नए साइबर सुरक्षा नियम जारी किए हैं। अब ऐप उसी SIM पर चलेगा जिससे अकाउंट बना है और वेब वर्जन हर छह घंटे में ऑटो लॉगआउट होगा। जानें इसका यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा।

भारत में WhatsApp, Telegram, Signal जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के उपयोग का तरीका अब बदलने वाला है। दूरसंचार विभाग ने एक नया साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत इन ऐप्स को चलाने के लिए वही मोबाइल नंबर सक्रिय रूप से फोन में लगा होना जरूरी होगा जिससे अकाउंट रजिस्टर किया गया है। यह नियम फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे।

इन बदलावों का उद्देश्य साइबर फ्रॉड, स्पैम और विदेशों से होने वाली अनट्रेसेबल धोखाधड़ी को रोकना है। सरकार का तर्क है कि वर्तमान सिस्टम में मौजूद ढील का फायदा साइबर अपराधी लंबे समय से उठा रहे थे।

SIM हटते ही बंद होंगे मैसेजिंग ऐप्स

नए Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules 2025 के अनुसार, WhatsApp और दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अब लगातार SIM से लिंक रहेंगे। जैसे ही फोन से वह SIM निकाला जाता है जिससे यूजर ने अकाउंट बनाया था, ऐप तुरंत काम करना बंद कर देगा।

फिलहाल ऐप्स केवल OTP आधारित वेरिफिकेशन पर चलते हैं। एक बार वेरिफाई होने के बाद अकाउंट SIM के बिना भी लंबे समय तक एक्सेस किया जा सकता है। सरकार के मुताबिक यही लूपहोल अपराधियों को पहचान छिपाने का आसान रास्ता देता है। वे SIM निकालकर, बदलकर या देश से बाहर ले जाकर भी उसी अकाउंट से जुड़े रहते हैं, जिससे उन्हें ट्रेस करना बेहद कठिन हो जाता है।

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वेब लॉगिन पर भी सख्ती, हर छह घंटे में होगा ऑटो लॉगआउट

सबसे बड़े बदलावों में से एक वेब वर्जन से जुड़ा है। अब WhatsApp Web, Telegram Web और अन्य चैट सेवाओं का वेब संस्करण हर छह घंटे में अपने आप लॉगआउट हो जाएगा। यूजर को फिर से QR कोड स्कैन करके लॉगइन करना होगा।

अभी WhatsApp Web केवल तब लॉगआउट होता है जब मुख्य फोन 14 दिनों तक इस्तेमाल नहीं किया गया हो। सरकार का कहना है कि वेब-आधारित लॉगिन का फायदा उठाकर कई धोखेबाज विदेशों से भी भारतीय नंबर से फ्रॉड करते हैं क्योंकि इन लॉगिन को ट्रैक करना मुश्किल होता है।

सरकार को इन बदलावों की जरूरत क्यों महसूस हुई

DoT और इंडस्ट्री संगठनों के अनुसार एक बार वाले OTP वेरिफिकेशन मॉडल में बड़ा सुरक्षा अंतर पैदा हो गया था। अपराधी भारत में रजिस्टर्ड नंबर को दूसरे देश ले जाकर उससे ठगी कर लेते थे, जबकि SIM निष्क्रिय होने के बावजूद ऐप चालू रहता था।

SIM और ऐप के बीच लगातार लिंक बनने से:

• यूजर, नंबर और डिवाइस का स्पष्ट संबंध बनेगा
• संदिग्ध गतिविधि को तुरंत ट्रेस किया जा सकेगा
• फेक और स्पैम अकाउंट्स की संख्या घटेगी
• देश के बाहर से चलने वाले साइबर रैकेट पर लगाम लगेगी

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सरकार का मानना है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा और मोबाइल नंबर को डिजिटल पहचान की तरह एक भरोसेमंद इकाई बनाएगा।

क्या SIM-बाइंडिंग वाकई असरदार साबित होगी

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय मिश्रित है।
कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि यह कदम ट्रेसबिलिटी बढ़ाकर अपराधियों को पकड़ने में मदद करेगा। लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ठग अक्सर फर्जी डॉक्यूमेंट देकर नए SIM आसानी से ले लेते हैं, इसलिए यह बंदिश उनकी गतिविधियों पर बहुत बड़ा असर नहीं डाल पाएगी।

साइबर पॉलिसी विश्लेषक डॉ. राधिका मेहरा बताती हैं कि यह कदम सुरक्षा बढ़ाता जरूर है, लेकिन इससे सामान्य यूजर्स की असुविधा भी बढ़ सकती है।
वहीं टेलीकॉम इंडस्ट्री का तर्क है कि भारत में मोबाइल नंबर ही सबसे मजबूत डिजिटल पहचान है, इसलिए सुरक्षा का आधार इसी पर होना चाहिए।

आम यूजर्स के लिए इसका क्या मतलब

नए नियम लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं को अपनी दिनचर्या में बदलाव महसूस होगा।
• WhatsApp या Telegram को तभी चलाया जा सकेगा जब रजिस्टर्ड नंबर वाला SIM फोन में लगा हो
• SIM हटते ही ऐप तुरंत लॉगआउट हो जाएगा
• मल्टी डिवाइस फीचर बिना SIM के लगातार इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा
• वेब वर्जन का उपयोग करने वालों को हर छह घंटे में दोबारा QR कोड स्कैन करना पड़ेगा

जो लोग टैबलेट, सेकेंडरी फोन या बिना SIM वाले डिवाइस पर WhatsApp चलाते हैं, उनके लिए यह बदलाव ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

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मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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