India Forecast System Accurate weather forecasting, India’s new technological marvel: इंडिया फोरकास्ट सिस्टम ने भारत के मौसम पूर्वानुमान को एक नई ऊंचाई दी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस स्वदेशी हाई-रिजॉल्यूशन सिस्टम को लॉन्च किया है।
यह सिस्टम 6 किमी रिजॉल्यूशन के साथ मौसम की सटीक भविष्यवाणी करता है, जो दुनिया में सबसे उन्नत है। इससे बारिश, चक्रवात और आपदाओं की सटीक जानकारी मिलेगी। यह न केवल आपदा से होने वाले नुकसान को कम करेगा, बल्कि कृषि और विमानन जैसे क्षेत्रों को भी लाभ पहुंचाएगा। आइए, इस सिस्टम की खासियतों को जानें।
India Forecast System: सटीक मौसम की भविष्यवाणी
भारत फोरकास्ट सिस्टम (Weather Prediction India) 6 किमी रिजॉल्यूशन के साथ छोटे स्तर पर मौसम की जानकारी देता है। पुराने 12 किमी ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम की तुलना में यह दोगुना सटीक है। 2022 से इसकी टेस्टिंग चल रही थी, जिसने मानसून, चक्रवात और भारी बारिश की भविष्यवाणी में 30-64% तक सुधार दिखाया।
यह सिस्टम नाउकास्टिंग (अगले दो घंटों की भविष्यवाणी) में भी कारगर है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) पुणे ने इसे स्वदेशी रूप से विकसित किया है। यह तकनीक भारत को मौसम पूर्वानुमान में वैश्विक अग्रणी बनाती है (IMD Weather Forecast).
आपदा प्रबंधन और कृषि को मिलेगा लाभ
यह सिस्टम (Cyclone Prediction India) आपदा प्रबंधन, मानसून ट्रैकिंग, और कृषि जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह सिस्टम पंचायत स्तर की जरूरतों को ध्यान में रखता है। यह बाढ़, चक्रवात और भारी बारिश की सटीक जानकारी देगा, जिससे जान-माल का नुकसान कम होगा।
विमानन, जलमार्ग, और रक्षा क्षेत्रों को भी इससे मदद मिलेगी। यह सिस्टम स्थानीय स्तर पर मौसम की बारीक जानकारी देकर किसानों को सही समय पर निर्णय लेने में मदद करेगा।
बजट में वृद्धि, तकनीक में प्रगति
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का बजट 2014-15 में 400-500 करोड़ रुपये था, जो अब 20,000 करोड़ के करीब है। इस बढ़ोतरी ने स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा दिया। भारत फोरकास्ट सिस्टम (Monsoon Tracking System) इसका जीता-जागता उदाहरण है।
यह सिस्टम भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। सटीक मौसम भविष्यवाणी से न केवल आपदाओं से बचा जा सकेगा, बल्कि कृषि और अन्य क्षेत्रों में उत्पादकता भी बढ़ेगी। यह भारत की तकनीकी प्रगति का प्रतीक है।












