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Weather: चंडीगढ़ में मौसम की हर गतिविधि पर नजर, कैसे होता है बारिश, तापमान और मॉनसून का सटीक आकलन?

On: जून 8, 2025 12:50 अपराह्न
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Weather: चंडीगढ़ में मौसम की हर गतिविधि पर नजर, कैसे होता है बारिश, तापमान और मॉनसून का सटीक आकलन?
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Keeping an eye on every weather activity in Chandigarh, how is the accurate estimation of rain, temperature and monsoon done: मौसम केंद्र सेक्टर-39 बीते 14 साल से चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा के मौसम की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। यहां हर तीन घंटे बाद मौसम से संबंधित आंकड़े लिए जाते हैं। मेट्रोलॉजिकल वैदर, पालम को भेजा जाता है। हर तीन घंटे में एक ड्यूटी ऑफिसर और एक ड्यूटी असिस्टेंट पूरा डेटा कलेक्ट करके उसका रिकॉर्ड मेंटेन करते हैं। यही टीम डिजास्टर मैनेजमेंट सेल को हर 3 घंटे में नॉओ कास्ट डेटा भी भेजती है, जिसके आधार पर अलर्ट जारी किए जाते हैं।

Weather: पटियाला में छोड़े जाते हैं बलून

पटियाला में लगे रेडियो सोंडे रेडियो विंड (आरएसआरडब्ल्यू ) सिस्टम के द्वारा ऊपरी हवा के आंकड़े मापे जाते हैं। इसके लिए एक बलून में रेडियो सोंडे इंस्ट्रूमेंट लगाया जाता है, जिसमें जीपीएस भी लगा होता है। इससे वायुमंडल की परतों का डेटा मिलता है।

रडार स्क्रीन क्या है?

इस स्क्रीन पर ड्यूटी ऑफिसर हर वक्त मौसम की हर हरकत को देखते रहते हैं। कोई सिस्टम चंडीगढ़ या आसपास के इलाकों अप्रोच कर रहा है तो इस रडार से पता चल जाता है।

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ऑटोमेटिक वैदर सिस्टम

इस ऑटोमेटिक वेदर सिस्टम (एडब्ल्यूएस) भी लगा है, जिसकी मदद से तापमान, बारिश, एयर प्रेशर के आंकड़े मिलते हैं।

सॉयल थर्मामीटर

इससे 5 से 20 सेमी गहराई में मिट्टी के तापमान का पता लगाया जाता है। इसका डेटा सुबह 8:30 और शाम 5:30 बजे रिकॉर्ड किया जाता है।

मैनुअल ऑर्डिनरी रेन गेज सिस्टम

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बारिश को मैनुअली मापने के लिए यह सिस्टम लगा है। इसमें एक मेजरिंग ग्लास होता है। इसमें चार लीटर का कलेक्टर लगा होता है। उस कलेक्टर में जमा बारिश के पानी को 20 एमएम के मेजरिंग
ग्लास द्वारा मापा जाता है।

थर्मामीटर

इससे अधिकतम और न्यूनतम तापमान मापते हैं। एक ही इक्विपमेंट में मैक्सिमम और मिनिमम थर्मामीटर लगे होते हैं।

डबल स्टीवंसन स्क्रीन

यह एक शेल्टर है जिसमें थर्मामीटर, हाइग्रोमीटर, बैरोमीटर रखे जाते हैं। इसमें तापमान, नमी, ओस आदि के लिए अनुकूल माहौल होता है। यह इंस्ट्रूमेंट्स को धूप, पानी, हवा से बचाता है। इसमें घोड़े की पूंछ के बाल इस्तेमाल किए जाते हैं, जो नमी की मात्रा को जल्द माप लेते हैं।

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सेल्फ रिकॉर्डिंग रेन गेज

इसमें बारिश की मात्रा मापी जाती है। एक ग्राफ लगा होता है, यह एक बार में 10 एमएम बारिश ही ग्राफिकली रिकॉर्ड करता है। 10 एमएम से ज्यादा बारिश पर खुद साइफनिंग करके दोबारा से मापना शुरू कर देता है। यह चक्र चलता रहता है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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