Weather Today16 September: Big change in weather in the country! Rain alert in UP-Bihar till 18th September, cold will be severe!: देशभर में मौसम अब नया रंग दिखा रहा है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर थम गया है, लेकिन यूपी और बिहार में 18 सितंबर तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट है।
इस साल मानसून ने सामान्य से ज्यादा सक्रियता दिखाई, जिसके चलते बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाएं देखने को मिलीं। अब सर्दियों की दस्तक के साथ मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस बार कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। आइए जानते हैं मौसम का पूरा अपडेट।
उत्तर भारत में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश का सिलसिला लगभग रुक गया है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिलहाल बारिश की ज्यादा संभावना नहीं है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले एक हफ्ते तक इन इलाकों में मौसम साफ रहेगा।
हालांकि, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। रातें अब ठंडी होने लगी हैं, और मौसम विभाग का कहना है कि इस साल सर्दियां सामान्य से ज्यादा सर्द रहेंगी। यानी गर्मी और बारिश के बाद अब ठंड ने धीरे-धीरे कदम रख दिया है।
मॉनसून कब जाएगा? Weather Today
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की विदाई 15 सितंबर से शुरू हो सकती है। आमतौर पर मॉनसून जून में केरल से दस्तक देता है और जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।
इसकी विदाई सितंबर के तीसरे हफ्ते से शुरू होकर अक्टूबर के मध्य तक पूरी होती है। इस बार मॉनसून नौ दिन पहले ही पूरे देश में पहुंच गया था, जो 2020 के बाद पहली बार हुआ।
यूपी-बिहार में बारिश का कहर
जबकि राजस्थान और पश्चिमी भारत में मॉनसून विदाई की ओर बढ़ रहा है, यूपी और बिहार में बारिश का दौर अभी थमने वाला नहीं है।
मौसम विभाग ने 18 सितंबर तक कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। कुछ इलाकों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। यह बारिश किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन जलभराव से फसलों को नुकसान का खतरा भी बना हुआ है।
इस बार की बारिश क्यों रही खास?
इस साल मॉनसून 24 मई को केरल पहुंचा, जो 2009 के बाद सबसे जल्दी था। पूरे देश में औसत से 7% ज्यादा बारिश हुई, यानी सामान्य 778.6 मिमी के मुकाबले 836.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।
खासकर उत्तर-पश्चिम भारत में 34% ज्यादा बारिश हुई। इस दौरान बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं भी सामने आईं, जिसने कई राज्यों में तबाही मचाई।
पंजाब-हिमाचल में बाढ़ और भूस्खलन
पंजाब में दशकों बाद सबसे भयानक बाढ़ देखी गई। नदियों का उफान और नहरों के टूटने से हजारों हेक्टेयर खेत डूब गए और लाखों लोग बेघर हुए।
हिमाचल और उत्तराखंड में बादल फटने और भूस्खलन से सड़कें, पुल और घर तबाह हो गए। जम्मू-कश्मीर में भी कई बार ऐसी घटनाएं हुईं। वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून की सक्रियता ने बारिश को और तीव्र किया।
क्या इस बार होगी कड़ाके की सर्दी?
मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार “ला नीना” के कारण सर्दियां सामान्य से ज्यादा ठंडी होंगी। अमेरिकी मौसम एजेंसी (CPC) के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच ला नीना के सक्रिय होने की 71% संभावना है। इसका असर भारत में ठंड को और बढ़ा सकता है।
ला नीना का मतलब और असर
ला नीना एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जो प्रशांत महासागर के पानी के ठंडा होने से होती है। यह विश्व के मौसम को प्रभावित करती है। कहीं बारिश बढ़ती है, कहीं सूखा पड़ता है, और कहीं सर्दी ज्यादा हो जाती है। भारत में ला नीना के दौरान मॉनसून अच्छा रहता है और सर्दियां कड़ाके की पड़ती हैं।
किसानों और आम लोगों पर असर
मॉनसून की विदाई और ठंड की शुरुआत का असर खेती और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। उत्तर भारत में रबी फसलों की बुवाई का समय शुरू होने वाला है। नमी से भरपूर जमीन गेहूं, चना, सरसों और जौ जैसी फसलों के लिए फायदेमंद होगी,
लेकिन ज्यादा ठंड से फसलों को नुकसान का डर भी है। आम लोगों के लिए अब ठंडी रातों की शुरुआत हो चुकी है, तो गर्म कपड़े और हीटर की तैयारी शुरू कर लें!













