Carrot Farming Top 3 varieties agriculture News: चंडीगढ़: अक्टूबर का महीना गाजर की खेती के लिए सबसे मुफीद समय माना जाता है। गाजर की फसल न सिर्फ पारंपरिक खेती से ज्यादा मुनाफा देती है, बल्कि इसे उगाना भी आसान है। सिर्फ 80 से 90 दिनों में ये फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसान जल्दी बाजार में बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा ने गाजर की तीन उन्नत किस्में—पूसा रुधिरा, पूसा वसुधा (संकर), और पूसा प्रतीक—विकसित की हैं, जो खेतों और बाजार में धूम मचा रही हैं। ये किस्में न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि ग्राहकों को पौष्टिक और स्वादिष्ट गाजर भी उपलब्ध कराएंगी। आइए जानते हैं इन किस्मों की खासियतें।
पूसा वसुधा (संकर) Carrot Farming
दिल्ली के किसानों के लिए पूसा वसुधा (संकर) गाजर की एक शानदार किस्म है। ये खासतौर पर गर्म मौसम में उगाने के लिए बनाई गई है, जिससे किसान हर मौसम में अच्छी पैदावार ले सकते हैं।
इसकी औसत उपज 35 टन प्रति हेक्टेयर है, जो पारंपरिक किस्मों से कहीं ज्यादा है। इसकी जड़ें कोनीकल आकार की और चमकीले लाल रंग की होती हैं। इसका मध्य भाग भी रंगीन और रसदार होता है, जो स्वाद में बेहद मीठा है। जड़ों की लंबाई 22-25 सेंटीमीटर और व्यास 4-4.5 सेंटीमीटर होता है। ये आकर्षक लुक और स्वाद इसे बाजार में खास बनाता है।
पूसा प्रतीक
पूसा प्रतीक गाजर की ऐसी किस्म है, जिसे राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में उगाने की मंजूरी मिली है। ये किस्म 85-90 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान जल्दी फसल बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं। इसकी औसत उपज 30 टन प्रति हेक्टेयर है।
इसकी जड़ें 20-22 सेंटीमीटर लंबी और 100-120 ग्राम वजनी होती हैं। इसका आकार संकीर्ण आयताकार, कंधे चपटे और सिरे नुकीले होते हैं। जड़ों का बाहरी और आंतरिक रंग गहरा लाल होता है, जो इसे पौष्टिक और आकर्षक बनाता है।
पूसा रुधिरा
दिल्ली और आसपास के इलाकों में पूसा रुधिरा किस्म खूब पसंद की जा रही है। इसकी औसत उपज भी 30 टन प्रति हेक्टेयर है। इसकी जड़ें लंबी, गहरे लाल रंग की और रसदार होती हैं।
इसका स्वाद मीठा है, जो इसे सलाद, जूस, अचार, कैन्डिंग और सब्जी बनाने के लिए बेहतरीन बनाता है। पूसा रुधिरा पोषण से भरपूर है, जिसमें 7.6 मिग्रा./100 ग्राम कुल कैरोटिनॉइड, 4.9 मिग्रा./100 ग्राम बीटा कैरोटीन और 6.7 मिग्रा./100 ग्राम लाइकोपीन मौजूद है।
किसानों के लिए फायदे
इन तीनों किस्मों की सबसे बड़ी खासियत है कि ये न सिर्फ बाजार में आकर्षक दिखती हैं, बल्कि स्वाद और पोषण में भी लाजवाब हैं। इनसे किसानों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े शहरों और प्रोसेसिंग यूनिट्स में अच्छे दाम मिल सकते हैं। ये किस्में कम समय में ज्यादा उत्पादन देती हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।












