ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Carrot Farming: गाजर की खेती टॉप 3 किस्में देंगी 35 टन तक उत्पादन, जानें खासियतें!

On: October 4, 2025 8:42 AM
Follow Us:
Carrot Farming: गाजर की खेती टॉप 3 किस्में देंगी 35 टन तक उत्पादन, जानें खासियतें!
Join WhatsApp Group

Carrot Farming Top 3 varieties agriculture News: चंडीगढ़: अक्टूबर का महीना गाजर की खेती के लिए सबसे मुफीद समय माना जाता है। गाजर की फसल न सिर्फ पारंपरिक खेती से ज्यादा मुनाफा देती है, बल्कि इसे उगाना भी आसान है। सिर्फ 80 से 90 दिनों में ये फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसान जल्दी बाजार में बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा ने गाजर की तीन उन्नत किस्में—पूसा रुधिरा, पूसा वसुधा (संकर), और पूसा प्रतीक—विकसित की हैं, जो खेतों और बाजार में धूम मचा रही हैं। ये किस्में न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि ग्राहकों को पौष्टिक और स्वादिष्ट गाजर भी उपलब्ध कराएंगी। आइए जानते हैं इन किस्मों की खासियतें।

पूसा वसुधा (संकर) Carrot Farming

दिल्ली के किसानों के लिए पूसा वसुधा (संकर) गाजर की एक शानदार किस्म है। ये खासतौर पर गर्म मौसम में उगाने के लिए बनाई गई है, जिससे किसान हर मौसम में अच्छी पैदावार ले सकते हैं।

गेहूं उत्पादन में 10% की गिरावट का अनुमान: क्या महंगी होगी आपकी रोटी? जानें पूरी रिपोर्ट
गेहूं उत्पादन में 10% की गिरावट का अनुमान: क्या महंगी होगी आपकी रोटी? जानें पूरी रिपोर्ट

इसकी औसत उपज 35 टन प्रति हेक्टेयर है, जो पारंपरिक किस्मों से कहीं ज्यादा है। इसकी जड़ें कोनीकल आकार की और चमकीले लाल रंग की होती हैं। इसका मध्य भाग भी रंगीन और रसदार होता है, जो स्वाद में बेहद मीठा है। जड़ों की लंबाई 22-25 सेंटीमीटर और व्यास 4-4.5 सेंटीमीटर होता है। ये आकर्षक लुक और स्वाद इसे बाजार में खास बनाता है।

पूसा प्रतीक

पूसा प्रतीक गाजर की ऐसी किस्म है, जिसे राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में उगाने की मंजूरी मिली है। ये किस्म 85-90 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान जल्दी फसल बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं। इसकी औसत उपज 30 टन प्रति हेक्टेयर है।

इसकी जड़ें 20-22 सेंटीमीटर लंबी और 100-120 ग्राम वजनी होती हैं। इसका आकार संकीर्ण आयताकार, कंधे चपटे और सिरे नुकीले होते हैं। जड़ों का बाहरी और आंतरिक रंग गहरा लाल होता है, जो इसे पौष्टिक और आकर्षक बनाता है।

₹24 लाख प्रति एकड़ की कमाई! मेरठ यूनिवर्सिटी ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, किसानों की लगेगी लॉटरी
₹24 लाख प्रति एकड़ की कमाई! मेरठ यूनिवर्सिटी ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, किसानों की लगेगी लॉटरी

पूसा रुधिरा

दिल्ली और आसपास के इलाकों में पूसा रुधिरा किस्म खूब पसंद की जा रही है। इसकी औसत उपज भी 30 टन प्रति हेक्टेयर है। इसकी जड़ें लंबी, गहरे लाल रंग की और रसदार होती हैं।

इसका स्वाद मीठा है, जो इसे सलाद, जूस, अचार, कैन्डिंग और सब्जी बनाने के लिए बेहतरीन बनाता है। पूसा रुधिरा पोषण से भरपूर है, जिसमें 7.6 मिग्रा./100 ग्राम कुल कैरोटिनॉइड, 4.9 मिग्रा./100 ग्राम बीटा कैरोटीन और 6.7 मिग्रा./100 ग्राम लाइकोपीन मौजूद है।

किसानों के लिए फायदे

इन तीनों किस्मों की सबसे बड़ी खासियत है कि ये न सिर्फ बाजार में आकर्षक दिखती हैं, बल्कि स्वाद और पोषण में भी लाजवाब हैं। इनसे किसानों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े शहरों और प्रोसेसिंग यूनिट्स में अच्छे दाम मिल सकते हैं। ये किस्में कम समय में ज्यादा उत्पादन देती हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

किसान भाइयों! बिना Farmer ID और e-KYC के नहीं मिलेगी 23वीं किस्त, सरकार ने जारी किया अलर्ट
किसान भाइयों! बिना Farmer ID और e-KYC के नहीं मिलेगी 23वीं किस्त, सरकार ने जारी किया अलर्ट

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment