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Chickpea Varieties: टॉप 3 चना वैरायटीज से होगी बंपर कमाई! 32 क्विंटल/हेक्टेयर तक उत्पादन

On: November 23, 2025 9:42 AM
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Chickpea Varieties: टॉप 3 चना वैरायटीज से होगी बंपर कमाई! 32 क्विंटल/हेक्टेयर तक उत्पादन
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Chickpea Varieties: भारत में चना ऐसी फसल है जिसकी डिमांड पूरे साल बनी रहती है—चाहे घर की रसोई हो या फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री। किसान अगर सही किस्म चुन लें तो कम लागत में भी रिकॉर्ड तोड़ पैदावार संभव है। ICAR ने चने की 3 हाई-यील्ड किस्में विकसित की हैं—बी जी 3022 काबुली, बी जी 3043 देसी और पूसा चना 20211 (पूसा मानव) देसी, जिनसे किसान 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज ले सकते हैं।

देश में चने की बढ़ती मांग Chickpea Varieties

चना भारत की सबसे ज्यादा खपत वाली दालों में शामिल है। बेसन, पकौड़े, मिठाइयां, नमकीन, स्नैक्स और कई घरेलू व्यंजनों में इसका उपयोग हर मौसम में होता है। इसके चलते बाजार हमेशा सक्रिय रहता है और किसानों को अच्छा भाव मिलता है।

ICAR की नई किस्में विशेष रूप से ऐसी बनाई गई हैं कि किसान कम लागत में भी ज्यादा मुनाफा पा सकें।

टॉप 3 हाई-यील्ड चना वैरायटीज

1. बी जी 3022 काबुली – बड़े दाने, बड़ी कमाई
यह किस्म खासतौर पर सिंचित क्षेत्रों के लिए बेहतरीन है। काबुली चने का बड़ा और सफेद दाना बाजार में महंगे रेट पर बिकता है।

मुख्य विशेषताएं:

परिपक्वता अवधि: करीब 145 दिन

उपज क्षमता: 18–30 क्विंटल/हेक्टेयर

उपयुक्त क्षेत्र: उत्तर भारत, मध्य भारत, राजस्थान

रोहतक के किसानों का नया दांव: गेहूं-धान छोड़ चुकंदर से कमा रहे बंपर मुनाफा
रोहतक के किसानों का नया दांव: गेहूं-धान छोड़ चुकंदर से कमा रहे बंपर मुनाफा

सफेद-बड़े दानों की वजह से ज्यादा कीमत मिलती है

2. बी जी 3043 देसी – कम खर्च, ज्यादा फायदा

सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए यह किस्म बहुत लाभदायक है। कम सिंचाई और कम खाद में भी अच्छी उपज देती है।

मुख्य विशेषताएं:

परिपक्वता अवधि: 130 दिन (तेजी से पकने वाली)

उपज क्षमता: 16–25 क्विंटल/हेक्टेयर

जड़ सड़न, सूखा व पत्ती धब्बा रोग से सुरक्षा

कम लागत में बेहतर उत्पादन

हरियाणा सरकार का किसानों को तोहफा, अब वापस मिलेगी सरकारी ट्यूबवेल वाली जमीन
हरियाणा सरकार का किसानों को तोहफा, अब वापस मिलेगी सरकारी ट्यूबवेल वाली जमीन

3. पूसा चना 20211 देसी (पूसा मानव) – बदलते मौसम के लिए परफेक्ट

ICAR की नई पीढ़ी की यह किस्म जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

मुख्य विशेषताएं:

परिपक्वता अवधि: सिर्फ 108 दिन (सबसे जल्दी पकने वाली किस्मों में शामिल)

उपज क्षमता: 23–32 क्विंटल/हेक्टेयर

उपयुक्त क्षेत्र: गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश

विल्ट रोग से उच्च प्रतिरोध

किसानों को क्या फायदे होंगे?

रोग प्रतिरोधी किस्में, फसल खराब होने का खतरा कम

किसानों के लिए नया नियम: बिना फार्मर आईडी नहीं मिलेगी खाद और बीज पर सब्सिडी
किसानों के लिए नया नियम: बिना फार्मर आईडी नहीं मिलेगी खाद और बीज पर सब्सिडी

कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार

बाजार में मिलता है ज्यादा भाव

छोटे और सीमांत किसान भी बढ़ा सकते हैं अपनी आय

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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