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Dwarfism Disease in Paddy: धान की फसल में नया खतरा! बौनापन रोग से बचाव के लिए तुरंत करें ये काम

On: अगस्त 29, 2025 12:29 अपराह्न
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Dwarfism Disease in Paddy: धान की फसल में नया खतरा! बौनापन रोग से बचाव के लिए तुरंत करें ये काम
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Dwarfism Disease in Paddy (हिसार) : देश में धान की खेती काफी बड़ी मात्रा प्रदेश में धान की खेती के साथ धान में नए तरह का रोग आया है। इसको बौनापन नाम दिया गया। इसके प्रकोप से किसान को काफी परेशानी है। रोग प्रबंधन के साथ हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानियों की तरफ से रोग का प्रकोप एवं रोकथाम के लिए दी सलाह दी है।

धान की प्रदेश में 31 लाख एकड़ से ज्यादा में खेती की जा रही है। मगर धान का कटोरा कहे जाने वाले पांच जिलों में बौनापन का रोग देखा गया। कृषि विज्ञानियों ने इस रोग के सामने आने के बाद ही प्रबंधन हेतु अपने सुझाव भी दिए। कृवि के विज्ञानियों की मानें तो संक्रमित पौधों का शीघ्र उखाड़ना व नष्ट करना जरूरी है।

रोगग्रस्त पौधों को पहचान कर उखाड़ें और गहरे गड्ढों में दबाएं या जलाकर नष्ट करें ताकि रोग का प्रसार न हो। नालियों और मेढ़ों की नियमित सफाई करें। खरपतवार और अनुवांछित पौधों को हटा कर नष्ट करें क्योंकि इन पौधों पर कीट आश्रय लेते हैं। इसके अलावा खेत में अधिक जलभराव न होने दें, उचित जल निकासी की व्यवस्था रखें।

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Dwarfism Disease in Paddy: पांच जिलों में ज्यादा दिक्कत

हकृति के कृषि विज्ञानियों ने बताया कि अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल और कैथल जिलों के किसानों के लिए धान में इस रोग की ज्यादा दिक्कत है। इन रोग का कहीं- कहीं असामान्य रूप से सामने आने पर कृषि विज्ञानियों की तरफ से इसे लेकर अनेक गाइडलाइन जारी की गई। किसानों को इस गाइडलाइन के अनुसार रोग प्रबंधन पर काम करना चाहिए। इससे फसल को बचाया जा सकेगा।

चार लाख से ज्यादा किसानों ने किया रजिस्टर

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सरकार की तरफ से मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर किसानों की तरफ से अपने आप को रजिस्टर किया गया है। इसमें चार लाख 18 हजार से ज्यादा किसानों ने खुद को रजिस्टर किया। यह किसान धान में गैर बास्मती को उगाते हैं। इसका क्षेत्र करीब 25 लाख 48 हजार एकड़ है। इसके अलावा बसमती चावल उगाने वाले किसान अलग है।

रोगवाहक कीटों का प्रबंधन

• नियमित कीट निगरानी खेतों का लगातार निरीक्षण करें। प्रारंभिक अवस्था में रोग वाहक कीटों की पहचान व उनके प्रभावी नियंत्रण से इस
रोग को रोकना आसान हैं।

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• नर्सरी में सफेद पीठ वाला तेला (हापर्स) नियंत्रण आवश्यक है। नर्सरी क्षेत्र में रोग वाहक कीट के प्रभावी नियंत्रण के लिए विज्ञानियों की सलाह
पर काम करें।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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