फरवरी का महीना देश भर के किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद ही खास और महत्वपूर्ण होता है। इस महीने में मौसम का तापमान न तो ज्यादा ठंडा होता है और न ही बहुत ज्यादा गर्म रहता है। ऐसे में फरवरी का यह संतुलित मौसम किसानों की कमाई के लिए पूरी तरह से नए अवसर खोलता है।
इस महीने में सर्द मौसम का प्रभाव कम हो जाता है। ऐसे में किसान गर्मी के मौसम वाली तीन प्रमुख सब्जियों भिंडी, करेला और खीरा की अगेती खेती कर तगड़ी आमदनी अर्जित कर सकते हैं। इन अगेती सब्जियों की खेती करने की तैयारी के बारे में सही जानकारी होना मुनाफे के लिए जरूरी है।
खेत की मिट्टी की सही तैयारी
अगर आप इन अगेती सब्जियों की सफल खेती करना सोच रहे हैं, तो सबसे पहले आप अपने खेत की दो से तीन दफा अच्छे से गहरी जुताई कर लें। ऐसा करने से खेत की मिट्टी को भरपूर धूप लग सकेगी और मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट और रोग पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।
इसके अलावा किसान अपने खेत की मिट्टी को और भी ज्यादा उपजाऊ बनाने के लिए उचित मात्रा में जैविक खाद का उपयोग करें। प्रति एकड़ लगभग 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में अच्छी तरह मिला लें। इससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और जल-धारण क्षमता काफी बेहतर हो जाएगी। इसके तुरंत बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी को बिल्कुल भुरभुरी बना लें ताकि पैदावार अच्छी हो।
भिंडी की खेती और बीजोपचार
फरवरी का महीना भिंडी की फसल के विकास के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। इसकी खेती की शुरुआत के लिए सबसे पहले बीजों को 12 से 15 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर छाया में सुखाएं। इसके बाद इन्हें थायरम या कार्बेन्डाजिम रसायन से सावधानीपूर्वक उपचारित करें।
बीजोपचार करने से फसल में फंगल रोगों का जोखिम काफी हद तक घट जाता है। बुवाई करते समय कतारों के बीच 45 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 15 से 20 सेंटीमीटर की पर्याप्त दूरी अवश्य रखें। संतुलित पोषण और नियमित सिंचाई व्यवस्था से भिंडी के पौधे खेत में तेजी से बढ़ते हैं। बाजार में इस अगेती भिंडी के बहुत अच्छे दाम मिल जाते हैं जिससे मुनाफा बढ़ता है।
ड्रिप सिंचाई से खीरे का उत्पादन
खीरा एक ऐसी नकदी और अगेती फसल है, जिसकी बाजार में मांग पूरे बारह महीने लगातार बनी रहती है। खीरे की खेती की तैयारी करने के लिए किसान सबसे पहले खेत में मेड़ या उठे हुए बेड अच्छी तरह तैयार करें। उसके बाद प्रति स्थान पर 2 से 3 बीज लगभग 2 सेंटीमीटर की गहराई पर जमीन में डालें।
अंकुरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद केवल एक स्वस्थ पौधा वहां छोड़कर बाकी अतिरिक्त पौधों को निकाल दें। खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए आधुनिक ड्रिप सिंचाई या मल्चिंग तकनीक को तुरंत अपनाएं। फसल की सही समय पर सिंचाई करते रहने से खीरे की शानदार पैदावार होती है।
मचान विधि से उगाएं स्वास्थ्यवर्धक करेला
बाजारों में ताजे करेले की मांग हमेशा बनी रहती है, क्योंकि इसका नियमित सेवन मानव सेहत के लिए बेहद ही लाभकारी होता है। करेला इंसान के ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन सुधारने, लीवर डिटॉक्स करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में भारी मदद करता है।
साथ ही इसमें मौजूद विटामिन सी, विटामिन ए और फाइबर हृदय और त्वचा के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। ऐसे में खेती की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले करेले के बीजों को हल्का कुरेदकर 10 से 12 घंटे पानी में भिगो दें। ऐसा करने से बीजों का अंकुरण खेत में तेजी से होता है। उसके बाद मचान विधि का उपयोग करके संतुलित उर्वरक प्रबंधन और जैविक कीट नियंत्रण करते रहें।
Hisar Krishi Darshan Expo: खारे पानी को मीठा बना देगी हॉलैंड की यह 2 करोड़ वाली मशीन
Haryana News Post पर नज़र बनाए रखें।












