रोहतक, Crop Damage Compensation: रोहतक और सांपला में जलभराव से बर्बाद फसलों ने किसानों की नींद उड़ा दी है। सरकार ने नुकसान का विवरण दर्ज करने के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला है, लेकिन किसान इसे बेवजह की कवायद बता रहे हैं। उनका कहना है कि जब आला अधिकारी और नेता प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुके हैं और खेतों में डूबी फसलें साफ दिख रही हैं, तो फिर पोर्टल पर आवेदन क्यों? अब तक जिले के करीब 10 हजार किसान पोर्टल पर नुकसान दर्ज कर चुके हैं, जो 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसलों को बर्बाद बता रहे हैं। इसमें 90% धान और बाकी गन्ना, ज्वार, बाजरा व कपास की फसलें हैं। पोर्टल 15 सितंबर तक खुला रहेगा, इसके बाद भी आवेदन न करने वालों के लिए एसडीएम के पास सीधे आवेदन की सुविधा होगी।
रोहतक में किसानों का गुस्सा फूटा
किसानों का कहना है कि प्रशासन की प्रक्रिया उन्हें उलझा रही है। इस्माइला के किसान शमशेर सिंह ने बताया कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं, फिर भी सरकार ने पोर्टल सिस्टम लागू कर परेशान किया है। उनका कहना है कि पटवारी से सर्वे करवाकर सीधे मुआवजा देना चाहिए। चुलियाणा के शमशेर सिंह ने मुआवजे की राशि को कम बताया और इसे बढ़ाने की मांग की। किसानों का कहना है कि गिरदावरी की जरूरत नहीं, क्योंकि नुकसान साफ दिख रहा है। फसल बर्बादी से आर्थिक संकट में फंसे किसान अगली बुवाई के लिए भी परेशान हैं।
नेताओं का दौरा, समस्याएं जस की तस
महम के पूर्व विधायक बलराज कुंडू ने मदीना, अजायब, भराण, सैमान, भैणी सूरजन, भैणी महाराजपुर, भैणी भैरों, सिसर खास, खेड़ी महम और बहलबा गांवों का दौरा किया। ग्रामीणों ने बताया कि महम ड्रेन और लाखनमाजरा ड्रेन का पानी नहरों में डाला जाता है, लेकिन मोटरों के कनेक्शन कटने से पानी की निकासी रुक गई है। कुंडू ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित रहे।
बसपा ने सौंपा ज्ञापन
बसपा कार्यकर्ताओं ने बाढ़ प्रभावित गांवों की समस्याओं को लेकर एसडीएम को डीसी के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि फरमाणा, सैमाण, मातो भैणी, भैणी सूरजन, अजायब, भराण, बलम्बा, बड़ाली, निडाना जैसे गांवों में मकानों में दरारें आ गई हैं। गरीब, मजदूर और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।












