बल्लभगढ़ (फरीदाबाद), Cotton Crop Damage: बल्लभगढ़ में इस बार भारी बारिश और कीटों के हमले ने कपास की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। जिले में 900 एकड़ जमीन पर लगाई गई कपास की फसल में से 147 एकड़ यमुना की बाढ़ और कीटों की वजह से नष्ट हो गई। किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल पाई है। हताश किसान अब सरकार से विशेष गिरदावरी कराकर मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बारिश और बाढ़ ने मचाई तबाही
कपास की फसल को कम पानी की जरूरत होती है, और इसे नकदी फसल के रूप में जाना जाता है। किसानों को सरकार हर साल कम सिंचाई वाली फसलों को बोने की सलाह देती है। कपास की फसल को जितनी ज्यादा निराई-गुड़ाई मिले, उतना ही बेहतर उत्पादन होता है। लेकिन इस बार जून से सितंबर तक लगातार हुई भारी बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पिछले पांच सालों में इतनी बारिश नहीं देखी गई। यमुना में आई बाढ़ और जलभराव ने 147 एकड़ कपास की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
कीटों का कहर, टेंट काना बर्बाद
जो फसल बची थी, उस पर कीटों ने हमला बोल दिया। कीटों के कारण कपास के पौधे सूख गए और टेंट काना बर्बाद हो गया। सागरपुर के किसान रणवीर सिंह ने बताया, “लगातार बारिश और जलभराव ने पौधों को सुखा दिया। कीटों ने टेंट काना खराब कर दिया, और कपास पूरी तरह नहीं खिल पाई। सरकार को विशेष गिरदावरी कर मुआवजा देना चाहिए।” वहीं, झाहसेतली के राम सिंह ने कहा कि उन्होंने 10 एकड़ में कपास बोई थी, लेकिन बारिश और कीटों ने सब बर्बाद कर दिया। लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
सरकार की सलाह
क्षेत्रीय कृषि विकास अधिकारी डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि बची हुई फसल को कीटों से बचाने के लिए किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए। सरकार इसके लिए 50% अनुदान दे रही है, जो 2000 रुपये प्रति एकड़ है। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा होगी। अनुदान पाने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर 30 सितंबर तक पंजीकरण कराना होगा।













