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Late Wheat Sowing: गेहूं देर से बोया? घबराएं नहीं! एक्सपर्ट्स ने बताया जबरदस्त तरीका, बंपर फसल

On: नवम्बर 25, 2025 9:38 पूर्वाह्न
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Late Wheat Sowing: गेहूं देर से बोया? घबराएं नहीं! एक्सपर्ट्स ने बताया जबरदस्त तरीका, बंपर फसल
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Late Wheat Sowing: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। कई बार धान की कटाई देर से पूरी होती है, जिसके कारण किसान गेहूं की बुवाई समय पर शुरू नहीं कर पाते।
लेकिन अच्छी खबर यह है कि अगर आप देरी से गेहूं बो रहे हैं, तो भी तकनीक और किस्म चयन में थोड़े बदलाव करके शानदार पैदावार ली जा सकती है।

सही किस्म चुनें और बढ़ाएं उत्पादन Late Wheat Sowing

किसान पुष्पेंद्र सिंह बताते हैं कि लेट बुवाई में सबसे पहले जरूरत है सही किस्म चुनने की।
गर्मी सहनशील और देर से बोने पर भी अच्छा परिणाम देने वाली गेहूं की वैरायटी—

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उषा तेजस (HI 8759)

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इन वैरायटीज़ की खासियत यह है कि तापमान बढ़ने पर भी ये अच्छी तरह बढ़ती हैं और दाने की गुणवत्ता बनाए रखती हैं।

गीले खेतों के लिए किसान राम अवतार की सलाह

खींचतान वाले मौसम में समय बचाने के लिए सुपर सीडर मशीन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं।
राम अवतार पटेल बताते हैं कि जहां पारंपरिक जुताई में खेत तैयार करने में 15–20 दिन लग जाते हैं, वही सुपर सीडर से खेत की नमी में ही सीधी बुवाई की जा सकती है।

जिन किसानों के खेत अभी गीले हैं, वे बिना देरी सुपर सीडर से बुवाई कर लें।
वहीं, सूखे खेतों में किसान सीड ड्रिल मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऐसे करें सिंचाई—एक्सपर्ट की पूरी गाइड

कृषि विशेषज्ञ संजय सिंह बताते हैं कि गेहूं की पहली सिंचाई बुवाई के 21–25 दिन बाद जरूर करनी चाहिए। इससे जड़ मजबूत होती है।
कुल 4–5 सिंचाई अनिवार्य हैं—

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दूसरी सिंचाई: 40–45 दिन में

तीसरी: 60–65 दिन में

चौथी: 80–90 दिन में

अंतिम सिंचाई: 100–110 दिन में

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समय पर सिंचाई से फसल की पैदावार काफी बढ़ जाती है।

पत्तियों का पीलापन दूर करें ऐसे

सर्द मौसम में गेहूं की पत्तियों के नीचे पीला पड़ना आम समस्या है।
संजय सिंह बताते हैं कि यह इसलिए होता है क्योंकि पौधे तक उर्वरक सही तरह नहीं पहुंच पाता।
अगर पत्तियों में पीलापन दिखे तो 8–10 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर छिड़काव करें। इससे पौधा फिर से हरा-भरा नजर आएगा।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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