Vegetable Farming September (रेवाड़ी) : किसान जड़ वाली सब्जियां मूली, गाजर, शलगम व पत्तेदार सब्जियों में पालक, बंदगोभी, मेथी, धनिया, फूलगोभी, बंदगोभी एवं ब्रोकली की बुवाई अगस्त सितंबर में कर सकते हैं। बुवाई से पहले 10-15 टन गोबर की खाद प्रति एकड़ डालें। अनुशंसित उर्वरक मात्रा 24:12:12 किलोग्राम एनपीके/एकड़ है, जिसमें नाइट्रोजन 2 बार में डालें। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें और नियमित नमी बनाए रखें। अक्टूबर के मध्य तक पहली कटाई हो जाती है। डॉक्टर सुरेश कुमार अरोड़ा, सब्जी सलाहकार महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल और सीसीएस एचएयू क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बावल के विशेषज्ञ डॉ. विकास गिल के अनुसार कुछ अहम बातों का जानना किसानों के लिए बेहद जरूरी है।
इन उन्नत किस्मों का करें चुनाव
मूली की आईवरी वाइट, पंजाब सफेद, हिसार मूली नंबर 3, जैपनिज व्हाइट लोंग आदि किस्में अच्छी हैं। गाजर की हिसार गैरिक, पूसा केसर आदि प्रसिद्ध किस्में हैं। शलगम में परपल टॉप वाइट ग्लो और 4-सफेद आदि अच्छी किस्में हैं, जबकि पालक की ऑल ग्रीन, जोबनेर ग्रीन, हिसार सिलेक्शन 23 व पूसा ज्योति आदि किस्में हैं। फूलगोभी की 1522, रिया, गिरजा, बिशप, कैस्पर आदि उन्नतशील किस्में शामिल हैं।
खेत की तैयारी व बिजाई करने की विधि
मूली और शलगम के बीजों को हल्की मिट्टी की डोलियां बनाकर ऊपर के सिरे पर हल्की नाली खोदकर लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर की दूरी पर डालना चाहिए। गाजर के बीजों को भूमि की अच्छी जुताई करने के पश्चात छिंटा विधि से बुवाई करके सुहागा लगा दें। किसान विशेष ध्यान रखें कि जड़ वाली सब्जियों का अधिक उत्पादन लेने के लिए भूमि में गोबर की खाद, केंचुआ खाद, जैविक खाद, मुर्गी की खाद का प्रयोग भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए करना चाहिए।
फूलगोभी और बंद गोभी की पनीरी ऐसे करें तैयार
बारिश से बचाकर फूल गोभी और बंद गोभी की पनीरी ऊपर उठे बेड़ों में बिजाई करके तैयार करें। बेड की लंबाई 2 मी. व चौड़ाई 90 से 100 सेमी. रखें। पौधशाला में कतार से कतार की दूरी 5 सेमी. और बीज से बीज की दूरी लगभग 2 से ढाई सेमी. रखें 30 से 35 दिन में पनीरी तैयार हो जाती है।
गाजर का बीज 3 से 5 किलो प्रति एकड़ डालें मूली के लिए 2 से 4 किलो प्रति एकड़, गाजर के लिए 3 से 5 किलो प्रति एकड़, शलगम के लिए एक से डेढ़ किलो प्रति एकड़ बीज पर्याप्त हैं। फूल गोभी और बंद गोभी के लिए 150 से 200 ग्राम बीज द्वारा तैयार की गई पौध प्रति एकड़ की दर से पर्याप्त है।
मूली की कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में
सितंबर की शुरुआत के साथ ही सब्जी उत्पादक किसान मूली (रैफनस सैटिवस) की बुवाई की तैयारी में जुट जाएं। इस अवधि के दौरान मध्यम तापमान और बढ़ती मिट्टी की नमी अंकुरण और जड़ विकास के लिए अच्छी परिस्थितियां प्रदान करती है। किस्में पूसा चेतकी जल्दी पकने वाली किस्म है।
काशी हंस (आईआईवीआर संकर) की चिकनी, सफेद जड़ें, एक समान आकार की होती है। सकाटा व्हाइट स्नो (निजी संकर) – अच्छी बिक्री योग्य उपज योग्य है। माहिको एमआरएच-1 उच्च उपज और एक समान जड़ें होती हैं। 3-4 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज डालें। पंक्तियों की दूरी 30 सेमी व पौधों की दूरी 8-10 सेमी रखें।












