Ashtami Navami Deepak Upay Astrology : शारदीय नवरात्रि 2026 में 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महानवमी तिथि का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जबकि 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। ज्योतिषीय और तांत्रिक दृष्टि से यह तिथि ऊर्जा के संतुलन और ग्रह शांति के लिए अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है। इस दिन घर के पांच प्रमुख ऊर्जा-केंद्रों पर किए जाने वाले दीपदान से राहु, केतु, शनि और गुरु दोषों का शमन होता है तथा घर का वास्तु चक्र संतुलित रहता है।
Navratri deepak upay for shani dosha : शारदीय नवरात्रि 2026 में 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महानवमी का एक साथ पड़ना ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष फलदायी माना जा रहा है। इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि की ये अंतिम तिथियां पंचतत्वों में से ‘अग्नि तत्व’ को जागृत कर आंतरिक और बाह्य नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने का सर्वोत्तम समय मानी जाती हैं।
शास्त्रों में दीपदान को केवल प्रकाश का साधन नहीं, बल्कि ग्रहों के दुष्प्रभाव दूर करने और वास्तु दोष शांत करने का अचूक उपाय माना गया है। शाम के समय घर के पांच विशिष्ट ऊर्जा-क्षेत्रों में दीपक जलाने से भाग्य के अवरोध दूर होते हैं।
मुख्य द्वार पर राहु शांति
घर का मुख्य प्रवेश द्वार वास्तु शास्त्र में ऊर्जा का संचरण बिंदु और ज्योतिष में राहु के प्रभाव क्षेत्र से जुड़ा माना जाता है। महाष्टमी और नवमी की गोधूलि वेला में मुख्य द्वार के दोनों कोनों पर दीपक प्रज्वलित करने से घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक तरंगें नष्ट होती हैं।
दीपक को दरवाजे के पास सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि अग्नि तत्व का लाभ मिले और आवागमन में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
तुलसी के पास गुरु-शुक्र बल
तुलसी का पौधा घर के ईशान कोण और दैवीय ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है, जो कुंडली में देवगुरु बृहस्पति और शुक्र को बल प्रदान करता है। अष्टमी और नवमी की शाम तुलसी के पास शुद्ध घी का दीपक जलाने से कुंडली के शुभ ग्रहों का प्रभाव बढ़ता है।
यह दीपदान पारिवारिक क्लेश दूर करने और मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। ध्यान रखें कि दीपक की लौ तुलसी दल को सीधे स्पर्श न करे।
रसोईघर में आग्नेय संतुलन
रसोईघर का संबंध सीधे तौर पर आग्नेय कोण और मंगल देव से माना जाता है, जहां माता अन्नपूर्णा का वास होता है। इस पवित्र स्थान पर दीपदान करने से मंगल और सूर्य का संतुलन सुधरता है तथा घर में अन्न-धान्य की कमी नहीं होती।
पीने के पानी के स्थान के पास दीपक रखने से चंद्रमा और अग्नि तत्व का शुभ संयोग बनता है। सुरक्षा के नियमों का ध्यान रखते हुए दीपक को गैस चूल्हे और ज्वलनशील पदार्थों से दूर सुरक्षित सतह पर ही रखें।
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उत्तर दिशा में कुबेर कृपा
वास्तु के अनुसार धन रखने की जगह और तिजोरी का संबंध उत्तर दिशा तथा बुध एवं कुबेर देव से होता है। अष्टमी और नवमी की रात धन स्थान के पास शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करने से धन के प्रवाह में आने वाले वास्तु दोष दूर होते हैं।
दीपक को अलमारी या नकद राशि के एकदम निकट रखने के बजाय किसी धातु की प्लेट में रखकर सुरक्षित दूरी पर ही जलाएं।
पीपल के नीचे शनि शांति
पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों का वास और शनि-राहु के दोषों को शांत करने की शक्ति मानी गई है। नवरात्रि की अष्टमी या नवमी की शाम पीपल की जड़ के समीप सरसों के तेल का चौमुखा या सामान्य दीपक जलाने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और पितृ दोषों का प्रभाव कम होता है। वृक्ष के पास दीपदान करते समय सूखी पत्तियों और टहनियों से दीपक को सुरक्षित दूरी पर रखें, जिससे किसी प्रकार की अग्नि दुर्घटना न हो। #AstrologyTips #Navratri2026 #GrahaShanti #DeepakUpay
अस्वीकरण: यह लेख पूर्णतः ज्योतिषीय मान्यताओं, पारंपरिक पंचांग और वास्तु सिद्धांतों पर आधारित है। हरियाणा न्यूज पोस्ट इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है।













