Ganesh murti astrology: गणेश चतुर्थी इस साल 14 सितंबर को मनाई जाएगी। भगवान गणेश की पूजा को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और भक्त गणपति की नई प्रतिमा खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में गणेश जी को बुद्धि, सुख, समृद्धि और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना गया है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी पर मूर्ति खरीदने से लेकर उसकी स्थापना और पूजा तक कई नियम बताए गए हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की हर प्रतिमा का स्वरूप एक जैसा नहीं माना जाता। सूंड किस दिशा में मुड़ी है, भगवान किस मुद्रा में हैं, प्रतिमा का रंग कैसा है और उसके साथ मूषक है या नहीं, इन बातों को भी पूजा के लिहाज से देखा जाता है। अगर आप इस गणेश चतुर्थी पर घर में नई प्रतिमा लाने जा रहे हैं तो इन मान्यताओं को ध्यान में रख सकते हैं।
घर के लिए कैसी गणेश प्रतिमा शुभ मानी जाती है?
ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यता के अनुसार घर में स्थापना के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड यानी वाममुखी गणेश प्रतिमा को शुभ माना जाता है। इसे सुख, शांति और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। वहीं दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा की पूजा में विशेष नियमों का पालन करने की मान्यता है।
गणेश जी की मुद्रा का भी अपना धार्मिक महत्व माना गया है। बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा को घर के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। मान्यता है कि बैठी हुई मुद्रा स्थिरता का प्रतीक है, इसलिए घर-परिवार की सुख-शांति के लिए ऐसी प्रतिमा को शुभ माना जाता है।
गणेश जी की सूंड किस दिशा में होनी चाहिए?
घर में गणेश जी की प्रतिमा खरीदते समय सूंड की दिशा सबसे ज्यादा देखी जाने वाली बातों में शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को वाममुखी गणेश कहा जाता है और इसे गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना जाता है।
दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को सिद्धिविनायक स्वरूप से जोड़ा जाता है। ऐसी प्रतिमा की पूजा में अधिक नियमों और सावधानी की आवश्यकता मानी जाती है। इसलिए सामान्य रूप से घर में स्थापना के लिए वाममुखी गणेश प्रतिमा चुनने की परंपरा है।
गणेश जी की मूर्ति का रंग और स्वरूप कैसा हो?
ज्योतिषीय मान्यताओं में केसरिया, सफेद और पीले रंग को शुभ माना गया है। इसलिए गणेश चतुर्थी पर इन रंगों की प्रतिमा घर लाने की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है। काले रंग की गणेश प्रतिमा घर में स्थापित न करने की सलाह भी धार्मिक मान्यताओं में दी जाती है।
मूर्ति खरीदते समय गणेश जी के पूरे स्वरूप को देखना भी जरूरी माना गया है। मान्यता के अनुसार उनके साथ मूषक यानी वाहन भी होना चाहिए। भगवान गणेश का दाहिना दांत पूरा और बायां दांत थोड़ा टूटा हुआ होना चाहिए। प्रतिमा में चार हाथ होने की बात भी धार्मिक स्वरूप का हिस्सा मानी जाती है।
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घर में गणेश जी की कितनी बड़ी मूर्ति रखें?
ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार घर के पूजा स्थल के अनुपात में गणेश जी की प्रतिमा का आकार रखना चाहिए। घर में बहुत बड़ी प्रतिमा रखने की बजाय छोटी और संतुलित आकार की मूर्ति को अधिक उपयुक्त माना जाता है।
मूर्ति खरीदते समय यह जरूर जांचना चाहिए कि वह कहीं से टूटी या खंडित न हो। घर के लिए शुद्ध मिट्टी, पीतल, तांबा, चांदी या सफेद संगमरमर से बनी प्रतिमा लेने की धार्मिक परंपरा बताई गई है।
गणेश जी की मूर्ति किस दिशा में स्थापित करें?
ज्योतिष और वास्तु मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए घर का उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण शुभ माना जाता है। इसके अलावा पूर्व दिशा में भी प्रतिमा रखने की परंपरा है।
स्थापना के समय पूजा स्थल को साफ रखने और शुभ मुहूर्त में प्रतिमा स्थापित करने की मान्यता है। गणेश जी को स्थापित करने के बाद फल-फूल अर्पित किए जाते हैं और मोदक या लड्डू का भोग लगाया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर पूजा में किन बातों का ध्यान रखें?
गणेश पूजा के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने की परंपरा है। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। चौकी का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखने की मान्यता है।
पूजा के दौरान तांबे के बर्तन में पानी, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखे जाते हैं। इसके बाद भगवान गणेश को फल-फूल अर्पित कर मोदक या लड्डू का भोग लगाया जाता है और आरती की जाती है।
ध्यान रखें: गणेश जी की मूर्ति के स्वरूप, दिशा, रंग और स्थापना से जुड़ी बातें ज्योतिषीय तथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में पूजा की विधि अलग हो सकती है। #GaneshChaturthi #GanpatiBappaMorya #Astrology
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