कैंची धाम वाले नीम करौली बाबा को उनके भक्त हनुमान जी का साक्षात अवतार मानते हैं। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आज भी उनके भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। बाबा की शिक्षाओं में हनुमान भक्ति का विशेष स्थान रहा, लेकिन वे भक्तों को केवल हनुमान जी का नाम लेने तक सीमित नहीं करते थे। वे भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण करने पर भी खास जोर देते थे और नियमित रूप से राम नाम का जाप करने की सलाह देते थे।
बाबा के संदेशों में नाम स्मरण को सरल और सहज भक्ति का माध्यम माना गया है। वे भक्तों को अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान का नाम लेने और सच्चे मन से उनका स्मरण करने के लिए प्रेरित करते थे। यही कारण है कि उनकी शिक्षाओं में राम नाम, कृष्ण नाम, हनुमान भक्ति और देवी उपासना सभी का उल्लेख मिलता है।
सीता-राम नाम का स्मरण क्यों महत्वपूर्ण माना?
नीम करौली बाबा भगवान श्रीराम और माता सीता की भक्ति को भी विशेष महत्व देते थे। वे सीता-राम नाम के स्मरण को ईश्वर से जुड़ने का सरल रास्ता मानते थे। उनके लिए भक्ति किसी एक रूप या नाम तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे मन और श्रद्धा के साथ भगवान को याद करना इसका मूल भाव था।
बाबा भगवान कृष्ण के नाम के स्मरण की बात भी करते थे। उनका संदेश था कि भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान का नाम ले सकता है। इसके लिए किसी एक नाम या स्वरूप को ही अनिवार्य मानने के बजाय सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करना अधिक जरूरी था।
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हनुमान भक्ति का श्रीराम से क्या संबंध था?
नीम करौली बाबा की हनुमान भक्ति को समझने के लिए भगवान श्रीराम के प्रति हनुमान जी की भक्ति को समझना जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं में हनुमान जी को भगवान श्रीराम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। इसलिए बाबा के लिए हनुमान जी का स्मरण अपने आप में श्रीराम की भक्ति से जुड़ा हुआ था।
इसी वजह से बाबा हनुमान चालीसा के पाठ के साथ राम नाम के जाप को भी महत्व देते थे। हनुमान जी की उपासना और श्रीराम के नाम का स्मरण उनके भक्ति संदेश में अलग-अलग रास्ते नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े हुए भाव के रूप में दिखाई देते हैं।
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मां दुर्गा और दूसरे देवी-देवताओं के बारे में बाबा की क्या मान्यता थी?
नीम करौली बाबा मां दुर्गा और दूसरे देवी-देवताओं के स्मरण को भी ईश्वर की उपासना का ही एक रूप मानते थे। उनकी भक्ति की सोच किसी एक देवी-देवता के नाम तक सीमित नहीं थी। वे भक्तों को अपनी आस्था के अनुसार भगवान का नाम लेने और श्रद्धा के साथ उसका स्मरण करने की प्रेरणा देते थे।
इस तरह बाबा की शिक्षाओं में राम नाम, कृष्ण नाम, हनुमान भक्ति और देवी उपासना सभी का मूल उद्देश्य एक ही था मन को ईश्वर से जोड़ना। उनके संदेशों को मानने वाले भक्तों के लिए नाम जाप केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मन को एकाग्र करने और भक्ति भाव बनाए रखने का माध्यम भी रहा।









