Ganesh Chaturthi 2026 Date: गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस दिन भगवान गणेश की स्थापना कर श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में गणपति को बुद्धि, विवेक, शुभ कार्यों और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है, इसलिए गणेश चतुर्थी को नई शुरुआत के लिए विशेष माना जाता है।
ज्योतिष में भगवान गणेश की आराधना का संबंध विशेष रूप से बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, गणना, व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में बुध कमजोर माना जाता है, वे गणेश जी की पूजा और मंत्र जाप को शुभ मानते हैं।
भगवान गणेश और मूलाधार चक्र का क्या संबंध है?
योग और आध्यात्मिक परंपरा में शरीर के सात प्रमुख चक्र बताए गए हैं। इनमें मूलाधार पहला चक्र माना जाता है और इसे स्थिरता, सुरक्षा, आधार तथा जीवन शक्ति से जोड़ा जाता है।
गणपति को मूलाधार चक्र का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि किसी भी साधना या नई यात्रा की शुरुआत से पहले मन और चेतना का स्थिर होना जरूरी है। गणेश जी को प्रथम पूज्य मानने की परंपरा को इसी प्रतीकात्मक विचार से जोड़कर देखा जाता है।
गणपति अथर्वशीर्ष में “त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्” मंत्र आता है। इसका अर्थ भगवान गणेश के मूलाधार में नित्य स्थित होने से जोड़ा जाता है।
किन राशियों के लिए गणेश पूजा विशेष मानी जाती है?
ज्योतिषीय मान्यताओं में गणेश जी की पूजा सभी राशियों के लिए शुभ मानी जाती है। हालांकि बुध ग्रह से संबंध के कारण मिथुन और कन्या राशि के जातकों के लिए गणपति आराधना को विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।
मिथुन और कन्या दोनों राशियों के स्वामी बुध हैं। इसलिए इन राशियों के जातक गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा, दूर्वा अर्पित करने और गणेश मंत्र का जाप करने को शुभ मान सकते हैं।
इसके अलावा जिन लोगों को पढ़ाई, व्यापार, लेखन, गणना, संचार या निर्णय लेने से जुड़े काम करने होते हैं, उनके लिए भी गणेश आराधना को ज्योतिषीय परंपरा में लाभकारी माना जाता है।
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राशि के अनुसार गणेश जी की पूजा कैसे करें?
मेष और वृश्चिक राशि के जातक गणेश जी को लाल फूल अर्पित कर सकते हैं और कार्यों में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना कर सकते हैं।
वृषभ और तुला राशि के जातक सफेद फूल अर्पित करके गणपति की पूजा कर सकते हैं। इन राशियों के लिए मानसिक शांति और कार्यों में स्थिरता की कामना के साथ पूजा करना शुभ माना जाता है।
मिथुन और कन्या राशि के जातक गणेश जी को दूर्वा अर्पित कर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बुध से संबंधित मामलों में गणपति की आराधना विशेष फल दे सकती है।
कर्क राशि के जातक गणेश जी की पूजा करते समय मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की कामना कर सकते हैं। सिंह राशि के लोग सफलता और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि की प्रार्थना के साथ गणपति का पूजन कर सकते हैं।
धनु और मीन राशि के जातक गणेश जी की पूजा के दौरान शिक्षा, ज्ञान और सही निर्णय की कामना कर सकते हैं। मकर और कुंभ राशि के जातक कामकाज में आने वाली रुकावटें दूर होने और योजनाओं में सफलता की प्रार्थना कर सकते हैं।
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर कौन सा मंत्र जाप करें?
गणेश पूजा में “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप सबसे सरल और लोकप्रिय मंत्रों में माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इसका जाप कर सकते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से गणेश चतुर्थी पर पूजा का उद्देश्य केवल किसी ग्रह दोष को दूर करना नहीं माना जाता। गणपति आराधना को बुद्धि, विवेक, धैर्य और शुभ शुरुआत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
गणेश चतुर्थी पर गणपति की स्थापना करते समय श्रद्धालु अपनी राशि और कुंडली के अनुसार विशेष पूजा भी कर सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति अलग होती है, इसलिए व्यक्तिगत ज्योतिषीय उपाय के लिए पूरी जन्मकुंडली का विश्लेषण जरूरी होता है।
नोट: राशि, ग्रह और चक्र से जुड़े लाभ ज्योतिष एवं आध्यात्मिक परंपराओं की मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सकीय या मनोवैज्ञानिक उपचार नहीं माना जाना चाहिए। #GaneshChaturthi2026 #GanpatiBappa #Jyotish










