24 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। इस दिन सावन का आखिरी सोमवार पड़ रहा है और वैष्णव परंपरा के अनुसार पुत्रदा एकादशी भी इसी दिन मनाई जा रही है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, जबकि पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है।
हालांकि पुत्रदा एकादशी की तिथि को लेकर गृहस्थ और वैष्णव परंपराओं में अंतर है। गृहस्थ परंपरा के अनुसार व्रत 23 अगस्त को रखा जा रहा है और उसका पारण 24 अगस्त को होगा, जबकि वैष्णव परंपरा में एकादशी व्रत 24 अगस्त को माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान के साथ दीपदान भी किया जाता है। श्रद्धालु घर की सुख-शांति, समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना के साथ अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाते हैं।
पुत्रदा एकादशी पर तुलसी के पास दीपक क्यों जलाया जाता है?
पुत्रदा एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। सबसे पहले तुलसी को जल अर्पित कर पूजा की जाती है, जिसके बाद घी का दीपक जलाया जा सकता है।
दीपक को तुलसी के पौधे से थोड़ी दूरी पर रखना चाहिए ताकि गर्मी से पत्तियों को नुकसान न पहुंचे। दीपक जलाते समय भगवान विष्णु का ध्यान और उनके नाम का जाप किया जा सकता है।
भगवान विष्णु के मंदिर में करें दीपदान
पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इसलिए इस दिन विष्णु मंदिर में दीपदान करने की भी परंपरा है।
शाम की पूजा के बाद भगवान विष्णु के सामने घी या तेल का दीपक जलाया जा सकता है। इस दौरान श्रद्धालु ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
जो लोग मंदिर जाते हैं, उनके लिए पूजा के समय मंदिर की स्थानीय व्यवस्था का पालन करना भी जरूरी है। खुले स्थान पर दीपक रखते समय आग और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शाम के समय पीपल के पास दीपक रखकर भगवान का स्मरण किया जा सकता है।
हालांकि दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अगर पेड़ के आसपास सूखी पत्तियां या कोई ज्वलनशील वस्तु मौजूद हो तो वहां दीपक नहीं जलाना चाहिए।
मंदिर नहीं जा सकते तो घर के पूजा स्थल पर जलाएं दीपक
अगर किसी कारण से श्रद्धालु मंदिर नहीं जा सकते, तो घर के पूजा स्थल पर ही दीपदान कर सकते हैं। भगवान विष्णु की पूजा के बाद घी का दीपक जलाकर कुछ समय मंत्र जाप किया जा सकता है।
श्रद्धालु विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं। धार्मिक परंपरा में दीपकों की संख्या से अधिक श्रद्धा और पूजा के भाव को महत्व दिया जाता है।
पुत्रदा एकादशी पर दीपक किस समय जलाना चाहिए?
दीपदान के लिए आमतौर पर शाम का समय शुभ माना जाता है। श्रद्धालु सूर्यास्त के आसपास या सूर्यास्त के बाद दीपक जला सकते हैं।
सूर्यास्त का समय अलग-अलग शहरों में अलग होता है। इसलिए सही स्थानीय समय के लिए अपने शहर के पंचांग को देखना बेहतर रहेगा।
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पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व क्या है?
‘पुत्रदा’ शब्द का अर्थ संतान प्रदान करने वाला माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इस व्रत को संतान सुख, संतान की मंगलकामना और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत कथा का श्रवण और मंत्र जाप करने की परंपरा है। राजा महीजित से जुड़ी पुत्रदा एकादशी की कथा का भी धार्मिक परंपराओं में उल्लेख मिलता है।
24 अगस्त को गृहस्थ परंपरा के व्रत का पारण
गृहस्थ परंपरा के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जा रहा है। इसके अगले दिन 24 अगस्त को द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाएगा।
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 24 अगस्त को दोपहर करीब 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक पारण का समय बताया गया है। हालांकि शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार इस समय में अंतर हो सकता है।
वैष्णव परंपरा में पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 अगस्त को माना जा रहा है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और पूजा-व्रत का पालन करना चाहिए। #SawanSomwar #PutradaEkadashi #Deepdan











