Rao Tularam Shaheedi Diwas Haryana : रेवाड़ी के अमर स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम का शहीदी दिवस अब क्षेत्रीय दायरा तोड़कर पूरे प्रदेश का साझा गौरव बनने जा रहा है। 23 सितंबर को पहली बार दक्षिण हरियाणा की सीमा से बाहर नवगठित हांसी जिले में राज्य का ध्यान खींचने वाला समारोह आयोजित हुआ। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के हालिया बयान (Aarti Rao health minister statement) के बाद 23 सितंबर 2027 से इसे औपचारिक रूप से प्रदेश स्तरीय समारोह के रूप में मनाने की रूपरेखा तैयार हो रही है।
प्रदेश स्तर पर आयोजन की मांग
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने 17 सितंबर (Haryana Veer Shaheedi Diwas 23 September) को रेवाड़ी में साफ संकेत दिए थे कि वह मुख्यमंत्री के समक्ष इस ऐतिहासिक दिन को राज्य स्तरीय दर्जा देने का प्रस्ताव रखेंगी। हांसी विधायक विनोद भयाना के आग्रह पर अहीरवाल से बाहर कार्यक्रम करने के फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा था कि शहीदों की शहादत किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रह सकती।
अगर सरकार आरती राव की इस मांग पर अंतिम मुहर लगाती है, तो 23 सितंबर 2027 से हरियाणा सरकार पूरे राज्य में आधिकारिक तौर पर व्यापक स्तर पर समारोह आयोजित करेगी। हालांकि 2027 के आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक अधिसूचना जारी होना अभी बाकी है, लेकिन सरकार का रुख सकारात्मक दिख रहा है।
हांसी में पहली बार समारोह क्यों?
इस बार का आयोजन इसलिए असाधारण है क्योंकि हिसार से अलग होकर बने हांसी जिले में पहली बार राव तुलाराम का शहीदी दिवस इतने बड़े स्तर पर मनाया गया। इस कार्यक्रम के जरिए राव तुलाराम के योगदान को मध्य और उत्तर हरियाणा के जनमानस तक मजबूती से पहुंचाया गया है। समारोह के दौरान शहर में राव तुलाराम चौक का औपचारिक लोकार्पण हुआ और उनकी विशाल प्रतिमा का अनावरण भी किया गया।
स्थानीय स्तर पर यह कदम केवल एक प्रतिमा स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हरियाणा के इतिहास को साझा सूत्र में पिरोने का प्रयास है। इस कदम से दक्षिण हरियाणा और बाकी जिलों के बीच सांस्कृतिक व ऐतिहासिक जुड़ाव और ज्यादा मजबूत हुआ है।
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23 सितंबर का राजनीतिक महत्व
23 सितंबर का दिन केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह (Rao Inderjit Singh) के सियासी सफर में भी बेहद खास मोड़ लेकर आया था। साल 2013 में इसी तारीख को उन्होंने कांग्रेस से अपनी राहें जुदा करते हुए ‘इंसाफ मंच’ बनाने का ऐलान किया था। ऐसे में हांसी का यह ताजा आयोजन और 2027 के लिए उठ रही राज्य स्तरीय मांग सियासी गलियारों में भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अहीरवाल के गौरव को जीटी रोड बेल्ट और बांगर क्षेत्र में सम्मान दिलाकर एक बड़ा सामाजिक संदेश दिया जा रहा है। यही वजह है कि इस बार 23 सितंबर के हर घटनाक्रम पर पूरे हरियाणा की निगाहें टिकी रहीं।
1857 की क्रांति और राव तुलाराम
इतिहास के पन्नों पर दर्ज तथ्यों के अनुसार राव तुलाराम का जन्म 9 दिसंबर 1825 को हुआ था और वे रेवाड़ी के वीर शासक थे। उन्होंने 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम (Rewari ruler 1857 revolt) में अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। 17 मई 1857 को उन्होंने रेवाड़ी तहसील पर कब्जा कर खुद का स्थानीय शासन स्थापित कर लिया था।
विद्रोह के बाद विदेशी मदद जुटाने के मकसद से वे ईरान और अफगानिस्तान के शासकों से संपर्क साधने देश से बाहर गए थे। इसी अभियान के दौरान 23 सितंबर 1863 को काबुल में Rao Tularam का निधन हो गया। हरियाणा सरकार के राजभवन रिकॉर्ड में इसी ऐतिहासिक तारीख को ‘हरियाणा वीर एवं शहीदी दिवस’ के रूप में दर्ज किया गया है, जिस दिन राज्य के सभी अमर बलिदानियों को नमन किया जाता है। #RaoTularam #HaryanaNews #ShaheediDiwas #AartiRao #HansiNews












