आकाशमंडल में ग्रहों के राशि परिवर्तन से कई शुभ-अशुभ संयोग बनते हैं, लेकिन शनि और चंद्रमा की युति से बनने वाले विष योग को ज्योतिष शास्त्र में सबसे ज्यादा तनावपूर्ण माना गया है। 6 जुलाई 2026 की सुबह जैसे ही चंद्रमा का गोचर मीन राशि में हुआ, वहां पहले से मौजूद शनिदेव के साथ मिलकर इस योग ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। ज्योतिष विज्ञान में चंद्रमा को मन, कोमल भावनाओं, मानसिक शांति और संवेदनशीलता का प्रतीक माना जाता है। इसके विपरीत, शनिदेव कर्म, कठिन संघर्ष, अनुशासन, धैर्य और कड़े इम्तिहान के कारक हैं। जब इन दो विपरीत स्वभाव वाले ग्रहों का मिलन एक ही राशि में होता है, तो आम जनमानस के विचारों पर दबाव बढ़ता है और रोजमर्रा के कामों में अकारण देरी होने लगती है।
मेष, सिंह और तुला राशि के लिए बढ़ा खतरा
इस गोचर का सबसे अधिक प्रभाव तीन विशेष राशियों पर देखने को मिलेगा। मेष राशि के जातकों के लिए यह समय मानसिक रूप से कठिन परीक्षा का है। आपके खर्चों में अचानक बेतहाशा बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है। दफ्तर या कार्यक्षेत्र में आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर अटक सकते हैं, इसलिए कोई भी नया निवेश करने से बचें और सहकर्मियों के साथ धैर्य से काम लें।
सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय पैसों के लेन-देन में भारी जोखिम लेकर आया है। इस अवधि में किसी भी अज्ञात योजना या व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करना बड़ी आर्थिक चंपत लगा सकता है। नौकरीपेशा और व्यापारियों को कार्यस्थल पर अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखना होगा, अन्यथा विवाद बढ़ सकता है।
तुला राशि के जातकों पर इस दौरान काम का बोझ और मानसिक दबाव चरम पर रहेगा। रोजमर्रा की जिम्मेदारियां आपको थका सकती हैं। इस राशि के लोगों को स्वास्थ्य के मोर्चे पर सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। नींद की कमी और खान-पान में लापरवाही के कारण शारीरिक कमजोरी या मौसमी बीमारियां आपको घेर सकती हैं।
विष योग के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विष योग की अवधि में नकारात्मक विचारों और डिप्रेशन से बचने के लिए खुद को सकारात्मक कार्यों में व्यस्त रखना चाहिए। किसी भी बड़े व्यावसायिक या व्यक्तिगत जीवन से जुड़े फैसले को जल्दबाज़ी में लेने से बचें। नियमित रूप से ध्यान, प्राणायाम और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ने पर मानसिक भटकाव कम होता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस योग से पूरे देश या हर व्यक्ति को डरने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी जातक पर इसका असर कितना गहरा होगा, यह पूरी तरह से उसकी जन्मकुंडली, ग्रहों के बल, वर्तमान में चल रही महादशा और अंतर्दशा पर निर्भर करता है। यदि किसी की कुंडली में चंद्रमा मजबूत स्थिति में है, तो इस विष योग का असर बेहद सामान्य या नगण्य हो जाता है।
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