Kanya Pujan Shubh Muhurat Vidhi : शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष विधान है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं और एक बालक (लांगुरिया) को भोजन कराने से नौ देवियों और काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सही चौघड़िया मुहूर्त में किया गया यह सत्कार घर में सुख, समृद्धि और शांति का संचार करता है।
Kumari pujan vidhi hindi : 11 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व में अब महाअष्टमी और महानवमी के दिन होने वाले कन्या पूजन (कंजक पूजन) की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। सनातन परंपरा और वैदिक ज्योतिष में कंजक पूजन के बिना नौ दिनों के व्रत व अनुष्ठान को अधूरा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की नौ कन्याओं को मां भगवती का साक्षात विग्रह मानकर पूजा जाता है। इस पूजन से जातक की कुंडली में नवग्रहों की शांति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है।
कंजक पूजन का शुभ मुहूर्त
अष्टमी और नवमी तिथि पर सूर्योदय के पश्चात चौघड़िया के शुभ, लाभ या अमृत मुहूर्त में कंजक पूजन (shardiya navratri kanya pujan rules) सबसे अधिक फलदायी माना गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सुबह 06:30 से 10:30 बजे के बीच का समय कन्या पूजन के लिए सर्वोत्तम रहेगा।
इस दौरान राहुकाल का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। राहुकाल के समय किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य या कन्या भोजन कराने से बचना चाहिए। सही समय पर किया गया यह पूजन परिवार के लिए सुख-समृद्धि और आरोग्य का वरदान लेकर आता है।
लांगुरिया पूजन क्यों है जरूरी?
शास्त्रों में नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को बैठाने का कड़ा नियम है। इस बालक को लांगुरिया (languriya pujan significance) या लांगूर कहा जाता है, जो भगवान भैरव का बाल स्वरूप माना जाता है।
मां दुर्गा के हर शक्तिपीठ और साधना में काल भैरव को उनका प्रधान रक्षक माना गया है। भैरव पूजन के बिना शक्ति की साधना पूर्ण नहीं होती, इसलिए लांगुरिया को भोजन कराकर दक्षिणा देने से देवी मां अत्यंत प्रसन्न होती हैं।
कन्या पूजन की सही विधि
कन्याओं को एक दिन पहले या सुबह आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित करें। घर आगमन पर स्वच्छ जल या कच्चे दूध से उनके चरण धोएं और साफ वस्त्र से पोंछकर स्वच्छ आसन पर बिठाएं।
इसके बाद सभी कन्याओं और लांगुरिया के माथे पर कुमकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं तथा कलाई पर रक्षा सूत्र (choghadiya muhurat for kanya pujan) बांधें। मां दुर्गा के प्रिय सात्विक भोग पूरी, हलवा और काले चने का प्रसाद प्रेमपूर्वक परोसें। भोजन के उपरांत उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं, सामर्थ्य अनुसार फल, श्रृंगार सामग्री और दक्षिणा भेंट करें। अंत में सभी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
आयु के अनुसार मिलने वाले फल
ज्योतिष शास्त्र में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं के स्वरूप और उनसे मिलने वाले फलों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है:
दो वर्ष की कन्या (कुमारी): इनके पूजन से घर में दरिद्रता दूर होती है तथा सुख, शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
तीन वर्ष की कन्या (त्रिमूर्ति): त्रिमूर्ति स्वरूपा कन्या की पूजा करने से परिवार में वंश वृद्धि, सुख-समृद्धि और वैभव मिलता है।
चार वर्ष की कन्या (कल्याणी): कल्याणी के पूजन से जीवन के सभी रुके हुए कार्य बनते हैं और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
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पांच वर्ष की कन्या (रोहिणी): रोहिणी स्वरूपा कन्या को भोजन कराने से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है।
छह वर्ष की कन्या (कालिका): कालिका रूपी कन्या की आराधना से जातक को विद्या, तीव्र बुद्धि और समाज में विशेष यश मिलता है।
सात वर्ष की कन्या (चंडिका): चंडिका के पूजन से जीवन में ऐश्वर्य, राजयोग और अपार धन संपदा का योग बनता है।
आठ वर्ष की कन्या (शाम्भवी): शाम्भवी स्वरूप की पूजा से सामाजिक मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है और कोर्ट-कचहरी या विवादों में विजय मिलती है।
नौ वर्ष की कन्या (दुर्गा): साक्षात दुर्गा स्वरूपा कन्या का आशीर्वाद मिलने से असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है।
दस वर्ष की कन्या (सुभद्रा): सुभद्रा कन्या की पूजा करने से जीवन के बड़े संकट टल जाते हैं और सभी भौतिक व आध्यात्मिक मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। #KanyaPujan #Navratri2026 #MaaDurga
अस्वीकरण: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है।













