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EV मालिकों के लिए अलर्ट: वारंटी के बाद बैटरी बदलवाने में लग सकता है 8 लाख तक का फटका, ऐसे बचाएं पैसे

On: March 18, 2026 12:17 PM
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EV मालिकों के लिए अलर्ट: वारंटी के बाद बैटरी बदलवाने में लग सकता है 8 लाख तक का फटका, ऐसे बचाएं पैसे
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इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का सबसे अहम और महंगा हिस्सा उसकी बैटरी होती है, जिसकी क्षमता समय के साथ धीरे-धीरे कम होने लगती है। भारत में आउट-ऑफ-वारंटी बैटरी बदलवाने का भारी-भरकम खर्च 5 से 8 लाख रुपये तक आता है, इसलिए कुछ आसान चार्जिंग टिप्स अपनाकर आम आदमी अपनी कार की बैटरी लाइफ और पैसे दोनों बचा सकता है।

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में इलेक्ट्रिक कारों (EV) का चलन तेजी से बढ़ा है। किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे महंगा हिस्सा उसकी बैटरी होती है, जो पूरे वाहन को ऊर्जा देती है। आमतौर पर एक नई ईवी की बैटरी 5 से 8 साल या लगभग 1.5 से 2 लाख किलोमीटर तक बिना किसी परेशानी के बेहतरीन तरीके से काम करती है।

ऐसे पहचानें बैटरी खराब होने के संकेत

अगर आपकी इलेक्ट्रिक कार फुल चार्ज होने पर पहले 300 किलोमीटर चलती थी और अब यह रेंज गिरकर 200 किलोमीटर रह गई है, तो यह बैटरी कमजोर होने का सबसे बड़ा संकेत है। इसके अलावा बार-बार चार्जिंग की जरूरत पड़ना या पहले के मुकाबले चार्ज होने में बहुत ज्यादा समय लगना भी खराब बैटरी सेल्स की तरफ सीधा इशारा करता है। गाड़ी के पिकअप में अचानक भारी गिरावट आना और डैशबोर्ड पर बैटरी वॉर्निंग लाइट का जलना यह बताता है कि बैटरी को तुरंत रिप्लेसमेंट की जरूरत है।

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आम आदमी की जेब पर बैटरी रिप्लेसमेंट का भारी बोझ

भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कार खरीदना आसान है, लेकिन वारंटी खत्म होने के बाद इसकी बैटरी बदलवाना आम आदमी की जेब पर भारी असर डालता है। भारत में ज्यादातर कंपनियां बैटरी पर 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर की स्टैंडर्ड वारंटी देती हैं। जब तक गाड़ी वारंटी पीरियड में है, तब तक कोई चिंता नहीं है। लेकिन इसके बाद बैटरी खराब होने पर ग्राहकों को 5 से 8.5 लाख रुपये तक का भारी-भरकम खर्च खुद अपनी जेब से उठाना पड़ता है। यही वजह है कि पुरानी इलेक्ट्रिक कारों की रीसेल वैल्यू बाजार में तेजी से गिर जाती है।

ये आसान तरीके बढ़ाएंगे आपकी EV बैटरी की लाइफ

अपनी इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे कभी भी शून्य (0) प्रतिशत तक पूरी तरह डिस्चार्ज न होने दें। इसी तरह इसे रोजाना 100 प्रतिशत तक फुल चार्ज करने से भी बचना चाहिए। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, 20 से 80 प्रतिशत के बीच चार्जिंग लेवल बनाए रखने से बैटरी के सेल्स पर सबसे कम दबाव पड़ता है और उसकी उम्र कई गुना बढ़ जाती है।

लगातार फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल करने से बैटरी बहुत ज्यादा गर्म होती है, जो उसकी सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसलिए जब भी संभव हो, घर पर लगे स्लो एसी (AC) चार्जर का ही उपयोग करें। इसके अलावा, अपनी गाड़ी को चिलचिलाती धूप में पार्क करने से बचें और अधिकृत सर्विस सेंटर पर समय-समय पर वोल्टेज व चार्जिंग स्टेटस चेक कराते रहें।

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भारत मेहंदीरत्ता

भारत मेहंदीरत्ता एक अनुभवी पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 11 वर्षों से ऑटो और क्रिकेट से जुड़ी खबरों पर रोचक और तथ्यपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की नवीनतम जानकारियों, जैसे कार-बाइक लॉन्च, प्राइस अपडेट्स, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, के साथ-साथ क्रिकेट की दुनिया की रोमांचक खबरों, जैसे मैच अपडेट्स, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट विश्लेषण को कवर करती हैं। भारत का लेखन शैली जीवंत, गहन और पाठक-केंद्रित है, जो ऑटो और क्रिकेट प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है।

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