चंडीगढ़, 11 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। बिना चाबी लगाए कार खुलने वाला ‘कीलेस एंट्री’ फीचर अब वाहन चोरी का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। साइबर अपराधी घर के अंदर रखी चाबी का सिग्नल चुराकर मिनटों में कार पार कर रहे हैं। इस खतरे से बचने के लिए एक्सपर्ट्स अब कार की चाबी को एल्युमिनियम फॉइल में लपेटकर रखने की सलाह दे रहे हैं।
असल में आधुनिक कारों में मिलने वाला कीलेस एंट्री फीचर अब सुरक्षित नहीं रहा। अपराधी अब बिना चाबी के ही वायरलेस सिग्नल हैक कर कार लेकर रफूचक्कर हो रहे हैं।
कैसे काम करता है ‘रिले अटैक’ का जाल
कीलेस एंट्री वाली कार और उसकी चाबी लगातार रेडियो सिग्नल्स के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में रहते हैं। साइबर अपराधी ‘रिले अटैक’ तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसमें दो डिवाइस होते हैं। एक डिवाइस घर की दीवार के पास रखा जाता है जो अंदर रखी चाबी का सिग्नल पकड़ता है। दूसरा डिवाइस कार के पास होता है जो उस सिग्नल को रिसीव कर कार का दरवाजा खोल देता है। कार को लगता है कि असली मालिक चाबी लेकर पास खड़ा है।
किचन वाला फॉइल कैसे बनेगा सुरक्षा कवच
इस हाई-टेक चोरी से बचने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका आपकी रसोई में ही मौजूद है। एल्युमिनियम फॉइल एक बेहतरीन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैरियर की तरह काम करता है। जब आप चाबी को इस फॉइल में पूरी तरह लपेट देते हैं, तो यह एक ‘फैराडे केज’ बना लेता है। इससे चाबी से निकलने वाले रेडियो सिग्नल बाहर नहीं जा पाते। सिग्नल न मिलने के कारण चोरों का डिवाइस फेल हो जाता है और आपकी महंगी कार सुरक्षित रहती है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार चाबी को सिर्फ फॉइल में लपेटना ही काफी नहीं है, उसे घर के मुख्य दरवाजे या खिड़की से दूर रखना चाहिए। आप अपनी कार की सुरक्षा को खुद भी चेक कर सकते हैं। चाबी को फॉइल में लपेटकर कार के पास जाएं और उसे खोलने की कोशिश करें। अगर कार अनलॉक नहीं हो रही है, तो समझ लीजिए कि आपका सुरक्षा घेरा काम कर रहा है। बाजार में अब विशेष ‘फैराडे पाउच’ भी उपलब्ध हैं जो इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।
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