Ambala News , Shocking accident in Ambala , Three members of a family died due to roof collapse: हरियाणा के अंबाला शहर में एक दुखद हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। मोती नगर डूंगी गोहर में बुधवार दोपहर एक पुराने मकान की छत अचानक ढह गई, जिसके मलबे में दबकर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई।
इस हादसे ने न केवल परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी। आइए, इस त्रासदी की पूरी कहानी और इसके पीछे की वजहों को समझते हैं।
मोती नगर में मकान ढहा, बुझ गया परिवार का चिराग Ambala News
बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे अंबाला के मोती नगर (लायलपुर बस्ती) में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पुराने मकान की छत अचानक धड़ाम से गिर पड़ी। इस हादसे में 34 वर्षीय राजू, उनकी 32 वर्षीय पत्नी अन्नू, और उनका 5 वर्षीय बेटा नूर अहमद मलबे में दब गए।
तीनों उस समय घर में खाना खा रहे थे। उनकी 7 वर्षीय बेटी खातिमा बाहर खेल रही थी, जबकि दादी आशा रानी खिलौने बेचने गई थीं। आसपास के लोगों ने मलबे की आवाज सुनकर तुरंत मदद शुरू की, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
परिवार की कहानी और हादसे का दर्द
मृतक राजू की मां आशा रानी मुस्लिम समुदाय से थीं और उन्होंने चंद्रमोहन से शादी की थी। चंद्रमोहन की मृत्यु के बाद आशा ने अकेले परिवार को संभाला। राजू ने असम की अन्नू से शादी की थी, और दोनों अपने दो बच्चों—खातिमा और नूर अहमद—के साथ गुब्बारे और खिलौने बेचकर जीवन यापन करते थे।
स्थानीय निवासी राकेश कुमार ने बताया, “राजू और अन्नू बहुत मेहनती थे। उनके बच्चे स्कूल में अच्छे थे। यह हादसा उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका है।” खातिमा, जो अब अनाथ हो चुकी है, और दादी आशा का रो-रोकर बुरा हाल है।
पड़ोसियों की मदद और पुलिस की कार्रवाई
हादसे की आवाज सुनते ही अरुण, शिवानी, सोनिया, राकेश, अंजू, और अभिषेक जैसे करीब 15 पड़ोसियों ने मलबे से तीनों को निकालने में जुट गए। किसी ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। अंबाला पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को मोर्चरी में रखवाया। गुरुवार को शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि मकान पुराना था और उसकी छत कच्ची कड़ियों पर टिकी थी। थाना प्रभारी ने बताया, “हम मकान की स्थिति और हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। परिवार को सहायता प्रदान की जाएगी।”
पुराने मकानों की सुरक्षा पर सवाल
यह हादसा पुराने और जर्जर मकानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है। अंबाला जैसे शहरों में कई बस्तियों में लोग कच्चे और कमजोर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
भवन विशेषज्ञ डॉ. संजीव शर्मा कहते हैं, “पुराने मकानों की नियमित जांच और मरम्मत जरूरी है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे।” स्थानीय निवासी सुनीता देवी कहती हैं, “हमारे इलाके में कई मकान पुराने हैं। सरकार को इनके लिए कुछ करना चाहिए, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।”
परिवार और समुदाय के लिए सलाह
खातिमा और आशा रानी के लिए यह समय बेहद कठिन है। समुदाय से अपील है कि वे इस परिवार को भावनात्मक और आर्थिक सहारा दें। जिन लोगों के मकान पुराने हैं, वे स्थानीय प्रशासन या भवन विशेषज्ञों से संपर्क कर उनकी स्थिति की जांच करवाएं।
किसी भी आपात स्थिति में डायल 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। प्रशासन से अनुरोध है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाए।
यह हादसा अंबाला के लिए एक बड़ी चेतावनी है। राजू, अन्नू, और नन्हा नूर अहमद की मौत ने न केवल एक परिवार को तोड़ा, बल्कि पूरे समुदाय को झकझोर दिया। उम्मीद है कि प्रशासन इस त्रासदी से सबक लेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।











