Chandigarh News The court ordered to de-seal the house sealed by CHB: बार-बार नोटिस देने के बावजूद लंबे समय तक किराया नहीं 45 जमा करवाने के कारण हाउसिंग बोर्ड ने सेक्टर-38 वेस्ट में एक मकान को सील कर दिया था। इस मामले में पीड़ित पक्ष को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने अपीलकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाउसिंग बोर्ड को सील किए गए मकान को डी- कोर्ट सील करने के आदेश दिए हैं।
Chandigarh News: याचिकाकर्ता को मिल हक
साथ ही याचिकाकर्ता पक्ष को 45 दिनों के के अंदर अपने मकान का बकाया किराया जमा करवाने को कहा है। याचिकाकर्ता शिवराज और योगिता हा कि ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के याद सेक्रेटरी की ओर से 4 मार्च 2020 देने को जारी किए गए बेदखली आदेश आई के के खिलाफ हरियाणा हाउसिंग बोर्ड है।
अधिनियम, 1961 की धारा 54 समन के तहत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अपील नवाई दायर की थी। अपील में कहा था नी के कि अफसरों ने उनके मकान को मनमाने ढंग से सील कर दिया था। तर्क दिया गया कि उन्हें बेदखली कॉल की कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित है और घर सीलिंग के कारण बेघर हो गया है। उनके स्कूल जाने वाले बच्चे अफसरों की मनमानी कार्रवाई के कारण अपनी शिक्षा और दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्हें यह मकान उनकी माता के नाम पर अलॉट हुआ था, लेकिन कुछ समय पहले माता का देहांत हो चुका है। उनकी मौत के बाद वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं और बोर्ड के समक्ष इस घर को अपने नाम पर ट्रांसफर के लिए भी तैयार हैं। जल्द बोर्ड कार्यालय में आवेदन कर देंगे।
सीएचबी की दलील
हाउसिंग बोर्ड के वकील ने तर्क दिया है कि विवादित मकान रोशनी और ओम प्रकाश को स्मॉल फ्लैट स्कीम 2006 के तहत 3 अगस्त 2009 के पत्र के माध्यम से इस शर्त पर आवंटित किया गया था कि लाइसेंसधारी 800 रुपये मासिक किराया देगा।
लेकिन इन लोगों ने मासिक किराया नहीं दिया और 19 तहत इनके मकान आवंटन को रद्द नवंबर 2019 को जारी आदेश के कर दिया गया। लाइसेंसधारी को बेदखली नोटिस जारी किया गया। लाइसेंसधारी रोशनी का अक्टूबर 2024 को निधन हो गया। उसके बाद बेदखली की कार्यवाही शुरू के लाइसेंसधारी नहीं हैं, उनका की गई। अपीलकर्ता उक्त मकान मकान पर कोई अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने कहा- कब्जा वापस नहीं दिया तो अपील बेकार हो जाएगी
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जारी आदेशों में कहा कि अपीलकर्ताओं ने बेदखली आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। यदि अपीलकर्ताओं को उनका कब्जा वापस नहीं दिया जाता है, तो उनकी अपील निष्फल हो जाएगी और बेदखली आदेश को चुनौती देने का उनका अधिकार समाप्त हो जाएगा। इसलिए कोर्ट ने संबंधित मकान को तुरंत डी-सील करने के आदेश दिए और अपीलकर्ताओं को भी 45 दिनों के अंदर बकाया राशि का 50 प्रतिशत जमा करने का निर्देश दिया।












