चंडीगढ़, 10 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा सरकार ने प्रदेश के बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर अब तक का सबसे बड़ा संकल्प लिया है। चंडीगढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय कन्वर्जेंस कमेटी की बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026-27 के दौरान प्रदेश से गंभीर कुपोषण को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए जमीनी स्तर पर घेराबंदी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना के लिए 170 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट जारी करना इसी कड़ी का हिस्सा है।
डिजिटल निगरानी और अंतिम व्यक्ति तक पहुंच
हरियाणा के मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डेटा आधारित निगरानी और फेस रिकग्निशन प्रणाली का उपयोग कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। प्रदेश के करीब 9.92 लाख लाभार्थियों की स्क्रीनिंग हो चुकी है और अब 99 प्रतिशत विकास निगरानी कवरेज का लक्ष्य है। सरकार का सीधा फोकस इस बात पर है कि योजना का लाभ बिचौलियों के बजाय सीधे जरूरतमंद बच्चों और माताओं तक पहुंचे। इसके लिए 15,900 आंगनवाड़ी केंद्रों को बिजली से जोड़कर हाई-टेक बनाया जा चुका है।
पंचायत और महिला सरपंचों की बड़ी भूमिका
कुपोषण के खिलाफ इस लड़ाई में अब स्थानीय पंचायतों को सेनापति बनाया जाएगा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि ग्राम सभा की बैठकों में पोषण को मुख्य मुद्दा बनाया जाए। विशेष रूप से महिला पंचों और सरपंचों को इस अभियान की कमान सौंपी जाएगी ताकि वे गांवों में व्यवहारिक बदलाव ला सकें। एनीमिया यानी खून की कमी से निपटने के लिए किशोरियों और महिलाओं को आयरन एवं फोलिक एसिड की खुराक नियमित रूप से दी जाएगी।
पोषण वाटिका और योग से बदलेगी तस्वीर
अब आंगनवाड़ी केंद्रों का स्वरूप बदलने वाला है। आयुष विभाग के सहयोग से केंद्रों पर पोषण वाटिकाएं विकसित की जाएंगी, जहां ताजी सब्जियां और फल उगाए जाएंगे। साथ ही, बच्चों और माताओं के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए मासिक योग दिवस का आयोजन अनिवार्य कर दिया गया है। बागवानी विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय और मौषमी फलों की खेती को बढ़ावा दें, जिससे ग्रामीण इलाकों में पौष्टिक आहार की उपलब्धता बनी रहे।
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