हरियाणा रोडवेज की वातानुकूलित बसों में 3 से 12 वर्ष तक के बच्चों से पूरा किराया वसूला जा रहा है, जबकि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग यानी सीटीयू की एसी बसों में इसी आयु वर्ग के बच्चों के लिए आधा किराया लागू है। इस अंतर ने यात्रियों खासकर परिवारों में असंतोष बढ़ा दिया है और कई लोग अब सीटीयू बसों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
किराया अंतर से यात्रियों में नाराजगी बढ़ी
यात्रियों का कहना है कि जब सुविधाओं और आराम के लिहाज से सीटीयू की बसें बेहतर मानी जाती हैं, फिर भी हरियाणा की बसों में बच्चों का पूरा टिकट वसूलना उचित नहीं लगता।
कैंट क्षेत्र के निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि वे पत्नी और साढ़े पांच साल के बच्चे के साथ लुधियाना जा रहे थे, लेकिन जब उन्हें बच्चे का पूरा टिकट देना पड़ा तो वे बस से उतर गए और सामान्य बस का विकल्प चुना।
सीटीयू बसें बेहतर सुविधाओं की वजह से लोकप्रिय
परिवारों के बीच बातचीत में एक आम धारणा यह है कि सीटीयू की एसी बसें सीट सुविधा, रखरखाव और यात्रा अनुभव में बेहतर हैं।
पटियाला जा रहे महेंद्र पाल ने कहा,
“सीटीयू में बच्चों का आधा टिकट लगता है, सीटें एडजस्टेबल हैं, इसलिए सफर आरामदायक होता है। हरियाणा रोडवेज की एसी बस में यह सुविधा नहीं है और ऊपर से पूरा टिकट देना पड़ता है।”
यात्री बताते हैं कि ऐसे में वे स्वाभाविक तौर पर सीटीयू की बसों की तरफ झुकते हैं।
किराया नीति क्यों बनी समस्या
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार,
हरियाणा रोडवेज किराए को प्रतिदिन औसत यात्री संख्या और परिचालन लागत से जोड़कर देखती है।
वहीं चंडीगढ़ प्रशासन की बस सेवा शहर आधारित है, जहां किराया नीति सामाजिक दृष्टि से अधिक लचीली है।
एक काल्पनिक परिवहन विश्लेषक बताते हैं,
“हरियाणा बस नेटवर्क ग्रामीण और लंबी दूरी के रूट में चलता है, इसलिए राजस्व बढ़ाने के लिए किराया नीति कड़े रूप में लागू की गई है। लेकिन यह यात्रियों की सहूलियत के अनुकूल नहीं दिखती।”
परिचालकों पर भी तनाव बढ़ा
ऑल हरियाणा इंटक यूनियन के सचिव और एचवीएसी बस परिचालक अनिल कुमार का कहना है कि टिकट को लेकर अक्सर झगड़े होते हैं।
वे बताते हैं,
“अभिभावक कई बार परिचालक पर आरोप लगाते हैं कि वे जानबूझकर पूरा किराया ले रहे हैं। विवाद बढ़ने पर कुछ लोग बस से उतर जाते हैं, जिससे यात्रियों की संख्या कम रह जाती है और संचालन प्रभावित होता है।”
क्यों मायने रखता है यह मुद्दा
यह किराया अंतर न सिर्फ यात्रियों की जेब पर असर डाल रहा है बल्कि हरियाणा रोडवेज के राजस्व और छवि पर भी असर डाल रहा है।
परिवार आधारित यात्रा का बड़ा हिस्सा अब सीटीयू की ओर शिफ्ट हो रहा है, जिससे बस रूटों की मांग और योजना संतुलन बिगड़ सकता है।
अगर नीति नहीं बदली गई तो यात्रियों की संख्या और विवाद दोनों बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि किराया समीकरण में सुधार यात्रियों और रोडवेज दोनों के लिए लाभकारी होगा।
क्या आगे बदलाव हो सकता है
परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार, किराया नीति की समीक्षा की संभावना मौजूद है, क्योंकि यात्रियों की शिकायतें बढ़ने लगी हैं। आने वाले समय में बच्चों के लिए रियायती किराया लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
हरियाणा रोडवेज और सीटीयू की किराया नीतियों में बड़ा अंतर यात्रियों को प्रभावित कर रहा है। नीतियों में समन्वय, सुविधाओं में सुधार और यात्रियों की सुनवाई सड़क परिवहन व्यवस्थाओं को अधिक भरोसेमंद बना सकती है।












