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समाज के लिए नहीं लड़ते तो अग्रवाल सभा के चुनाव टलते रहते, जानें क्या बोले सीए सुभाष गोयल

On: December 8, 2025 2:25 PM
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समाज के लिए नहीं लड़ते तो अग्रवाल सभा के चुनाव टलते रहते, जानें क्या बोले सीए सुभाष गोयल
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अंबाला छावनी में अग्रवाल सभा के चुनाव करीब साढ़े चार साल बाद फिर होने जा रहे हैं। इसका श्रेय सीए सुभाष गोयल को जाता है जो सभा को बचाने के लिए लगातार सरकार और प्रशासन के साथ पत्राचार करते रहे। सीए सुभाष गोयल का कहना है की कुछ लोग राजनीति के चलते समाज को बदनाम करने में जुटे हैं। यही कारण है कि चुनाव नहीं होने दिए और इससे सभा और समाज की छवि पर विपरीत असर पड़ा।

अब प्रशासन ने कार्यक्रम तय कर दिया है और अग्रवाल सभा के चुनाव के लिए मतदान 4 जनवरी 2025 को अग्रवाल धर्मशाला में होगा। उसी दिन परिणाम भी घोषित किए जाएंगे।
करीब 1450 से अधिक सदस्य मतदान में हिस्सा लेंगे, इसलिए इसे कैंट क्षेत्र के सबसे बड़े सामुदायिक चुनावों में से एक माना जा रहा है।

चुनाव प्रक्रिया की निगरानी प्रशासन के हाथ में

निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तहसीलदार को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। आधिकारिक अधिसूचना जारी होते ही समिति और प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
चुनाव में 50 कोलेजियम बनाकर वोटिंग करवाई जाएगी। हर कोलेजियम में लगभग 30 सदस्य होंगे, जो प्रधान, उपप्रधान, महासचिव और कोषाध्यक्ष चुनेंगे।
चुने गए पदाधिकारी आगे चलकर अपनी कार्यकारिणी टीम का विस्तार भी कर सकेंगे।

दो बड़े समूह आमने सामने

अधिसूचना जारी होते ही चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बार मुकाबला मुख्य रूप से दो समूहों के बीच रहेगा:

  • सुभाष गोयल गुट

  • राकेश कंसल गुट

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स्थानीय सदस्यों का कहना है कि यह चुनाव समाज में नेतृत्व और दिशा तय करने वाला होगा।

चुनाव में देरी की जड़ क्या थी

सभा में पिछले कुछ वर्षों से गुटबाजी और प्रशासनिक टकराव देखने को मिल रहा था।
एक पक्ष चाहता था कि चुनाव हों, जबकि दूसरा पक्ष प्रशासक नियुक्त करने पर जोर देता रहा। मामला इतना बढ़ा कि यह प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज के पास तक पहुंचा।

  • वर्ष 2017 से 2019 तक राकेश कंसल प्रधान रहे लेकिन चुनाव नहीं हुए

  • 2021 में भी चुनाव लंबित रहे और विवादों के चलते एडहॉक कमेटी बनानी पड़ी

  • रजिस्ट्रार से बार बार अनुमति मांगने के बावजूद प्रक्रिया अटकी रही

कनवीनर सुभाष गोयल के अनुसार, पोर्टल बंद रहने और अनुमति में देरी के कारण चुनाव नहीं हो सके। अब प्रशासक नियुक्त होने के बाद रास्ता साफ हुआ है और मतदान कराया जा रहा है।

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चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मतदान सिर्फ नेतृत्व बदलने का मामला नहीं है, बल्कि संगठन की कार्यशैली और पारदर्शिता का भी परीक्षण है।
स्थानीय सामाजिक विश्लेषक बताते हैं कि इतने लंबे अंतराल के बाद चुनाव होने से सदस्यों में नई उम्मीद जागी है और समुदाय की भूमिका मजबूत होने की संभावना है।

चुनाव प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश

प्रशासन ने मतदाताओं और उम्मीदवारों के लिए विस्तृत नियम जारी किए हैं। मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:

  • एक व्यक्ति केवल एक पद पर ही नामांकन दे सकता है

  • उम्मीदवार को दो फोटो और पहचान पत्र साथ लाना होगा

  • नामांकन सिर्फ संबंधित कोलेजियम के पंजीकृत सदस्य ही कर सकते हैं

  • नामांकन प्रस्तावक का किसी दूसरे उम्मीदवार के प्रस्तावक होना वर्जित है, वरना दोनों आवेदन रद्द होंगे

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  • मतदान के दौरान मतदाता पहचान पत्र साथ लेकर आएंगे

  • बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता रक्त संबंधी सहायक के साथ मतदान कर सकते हैं

  • मतगणना मतदान के तुरंत बाद शुरू होगी और परिणाम उसी दिन घोषित होंगे

परिणाम घोषित होते ही नए पदाधिकारियों को शपथ दिलवाई जाएगी और कार्यभार सौंपा जाएगा।

क्या आगे हो सकता है

स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि चुनाव शांति और पारदर्शिता से होते हैं तो अग्रवाल सभा में स्थायित्व और निर्णय क्षमता बढ़ेगी। इससे आने वाले वर्षों में समाजिक कार्यक्रमों, दान और विकास गतिविधियों में तेजी आ सकती है।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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