India Pak War India sovereignty, AAP’s anger on US intervention: Will India’s decisions now be decided by the White House?: आम आदमी पार्टी (AAP) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत-पाकिस्तान युद्धविराम की घोषणा को भारत की संप्रभुता पर हमला करार दिया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता अनुराग ढांडा ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या अब भारत के फैसले व्हाइट हाउस से तय होंगे? यह मुद्दा देश की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान से जुड़ा है, जिसने जनता के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। आइए, इस विवाद की पूरी कहानी समझते हैं।
भारत की संप्रभुता पर सवाल India Pak War India sovereignty
चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर रही थी और पीओके को वापस लेने का सुनहरा मौका सामने था।
ऐसे में अमेरिका के हस्तक्षेप को स्वीकार करना भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय गौरव के साथ छल है। ढांडा ने सवाल उठाया कि भारत ने हमेशा पाकिस्तान से जुड़े मामलों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को ठुकराया है, तो फिर ट्रम्प की घोषणा को क्यों मंजूर किया गया? यह भारत की विदेश नीति की कमजोरी और पीएम मोदी की खामोशी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ऑपरेशन सिंदूर: अधूरी कार्रवाई का दर्द
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी अड्डों को तबाह कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी। लेकिन ढांडा ने सवाल किया कि जब सेना आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर रही थी, तो सीजफायर की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष भारतीयों की हत्या करने वाले आतंकियों को सजा देने की कार्रवाई को अधूरा छोड़ना शहीदों का अपमान है।
ढांडा ने भावुक होकर पूछा कि उन चार आतंकियों का क्या हुआ, जिन्होंने बहनों की मांग का सिंदूर उजाड़ा? क्या उनका हिसाब बाकी है, या अमेरिका ने सब माफ करवा दिया?
सरकार से जवाब की मांग
ढांडा ने पीएम मोदी से मांग की कि वे इस मामले पर देश को सच बताएं। उन्होंने सरकार से तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने और संसद का विशेष सत्र आयोजित करने की अपील की।
उन्होंने पूछा कि ट्रम्प ने युद्धविराम की घोषणा क्यों की, और भारत ने इसे बिना विरोध के क्यों स्वीकार किया? यह घटना भारत की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाती है। ढांडा ने कहा कि जनता जानना चाहती है कि क्या भारत अब अमेरिकी निर्देशों पर चलेगा, या अपनी संप्रभुता को बरकरार रखेगा।
जनता का गुस्सा, देश का सम्मान
यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। यह भारत की स्वतंत्रता, सैन्य ताकत, और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा सवाल है।
AAP ने इस मुद्दे को उठाकर उन लाखों भारतीयों की भावनाओं को आवाज दी है, जो अपनी सेना पर गर्व करते हैं और देश की संप्रभुता को सर्वोपरि मानते हैं। ढांडा ने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट रहें और सरकार से पारदर्शी जवाब मांगें। यह समय देश के आत्मसम्मान को बचाने और विदेशी दबाव को खारिज करने का है।
सरकार की चुप्पी, सेना की ताकत
हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आतंकवाद के खिलाफ भारत की मजबूत कार्रवाई के रूप में देखा गया था, लेकिन सीजफायर और अमेरिकी हस्तक्षेप ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनता को उम्मीद है कि सरकार जल्द इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करेगी और भारत की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा। भारतीय सेना की ताकत और देश का गौरव हर हाल में बरकरार रहना चाहिए।
एकजुटता और सच्चाई की जरूरत
यह घटना हमें सिखाती है कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में एकजुटता और सच्चाई सबसे जरूरी है। सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत के फैसले स्वतंत्र और निष्पक्ष रहें। AAP का यह बयान एक चेतावनी है कि देश का सम्मान और संप्रभुता किसी भी कीमत पर दांव पर नहीं लगनी चाहिए।













